- शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के बयान पर प्रशांत किशोर ने कसा तंज, बोले- सम्राट चौधरी और तेजस्वी यादव 10वीं पास हो जाएं तो लोगों को विश्वास होगा कि ये मैट्रिक भी अपने दम पर पास कर सकते हैं
वहीं, बिहार के शिक्षा मंत्री के बयान पर तंज कसते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर शिक्षा मंत्री ने तेजस्वी यादव को 10वीं पास करने का सुझाव दिया है तो अगली कैबिनेट की बैठक में अपने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को यह सुझाव देंगे कि तेजस्वी यादव के साथ सम्राट चौधरी भी 10वीं का एग्जाम दें। मैं तो बिहार की जनता की ओर से पढ़े-लिखे युवाओं की ओर से आग्रह करूंगा कि यहां के नेता सम्राट चौधरी और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव दोनों अगली बार 10वीं का एग्जाम देकर पास हो जाएं ताकि यहां के लोगों को यह विश्वास हो कि ये नेता भी मैट्रिक भी अपने दम पर पास कर सकते हैं। पत्रकारों से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर कहा कि देशभर में युवा साथी जो कर रहे हैं उसका असर यह है कि पिछले 2-3 महीने में आप लोकतंत्र की ताकत देख रहे हैं, इसी बिहार में पिछले 3-4 वर्षों में जितनी बार कोई प्रदर्शन करने आया है उस पर लाठी चली है। आज कम से कम लाठी चलाने से पहले सरकार या प्रशासन दो बार सोच रहा है। ये लोकतंत्र की ताकत है और एक तरह से बेहतर बात है, छात्रों की जो जायज मांग है सरकार को उसे मानना चाहिए। चाहे वह TRE का मामला हो या अन्य जो छात्रों के मामले हैं। छात्रों के इन मामलों को सरकार दबा नहीं सकती है। जो कुछ भी जंतर-मंतर पर हुआ है, वह एकमात्र नहीं है। पूरे देश में शिक्षा का जो प्रावइवेटाइजेशन हुआ है, कोचिंग संस्थाओं का व्यवसायीकरण हुआ है उसके माध्यम से जो पेपर लीक हो रहा है और जो बड़े पैमाने पर बेरोजगारी है, इनको जब आप जोड़ेंगे तो युवाओं में एक बहुत बड़ा वर्ग है जो आज की व्यवस्था से नाखुश है। अगर, सरकार उनकी बातों पर गंभीरता से ध्यान नहीं देती है तो सड़कों पर छात्रों के आंदोलन और देखने को मिलेंगे।
वहीं, किसानों के आंदोलन पर पीके ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसानों का जो आंदोलन है, यह जो 11 सैटेलाइट सिटी बनाने की योजना की घोषणा सरकार ने की है, बिना कुछ समझे बड़े-बडे़ उद्योगपति और बिल्डर्स को मदद करने के लिए बिहार के मध्यम किसानों की जमीन को औने-पौने दाम पर बड़े उद्योगपतियों-बिल्डरों को देने की साजिश है, और एक साल उस जमीन पर कोई काम नहीं होगा, कोई खरीद-बिक्री नहीं कर सकता है। उसके खिलाफ समाज में व्यापक असंतोष है। सरकार जिस दिन से यह कानून लेकर आई थी उस दिन से हम लोग कह रहे हैं कि यह बिहार में संभव ही नहीं है। सरकार इसको नहीं कर पाएगी। समाज में इससे असंतोष बढ़ेगा और बड़े पैमाने पर इस पर आंदोलन होगा। सरकार के लिए संभव नहीं है कि हजारों एकड़ जमीन पूरे बिहार में 11 बड़े शहरों के इर्द-गिर्द इतनी महंगी जमीन अधिग्रहण कर सके। सरकार के पास सैलरी देने का पैसा नहीं है तो इतनी जमीन एक्वायर कैसे करेंगे? अगर, अधिग्रहण करेंगे तो किसानों को, भूमिधारकों को उसका मुआवजा मिलना चाहिए। यह कहने से कि जमीन का रिडेवल्पमेंट करके आपको वापस दे देंगे, उससे जमीन का भाव बढ़ जाएगा। इस बात पर कोई अपनी जमीन देने वाला नहीं है।

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