- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग ओबीसी मोर्चा ने दिया राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
दूसरे चरण की प्रश्नावली में ओबीसी का आप्शन नहीं दिया गया है। जाति आधारित जनगणना के लिए ओपेन कालम व्यवस्था की गयी है। इससे जनगणना के आंकड़े भ्रमित करने वाले आयेंगे क्योंकि ठीक इसी प्रकार से 2011 में कांग्रेस सरकार के द्वारा जातियों के ओपेन आप्शन की पद्धति से सर्वे में आंकड़े कलेक्ट्रेट किए गये थे जिसमें 46.7 लाख जातियां आयी और सरकार ने भ्रमित करने वाले आंकड़े बता कर उसको जारी करने से मना कर दिया था और ओबीसी के साथ धोखाधड़ी की गयी थी। ठीक वही पद्धति से इस जनगणना को करना ओबीसी सहित सभी जातियों के साथ धोखेबाजी होगी। इसलिए जो पद्धति एससी-एसटी की जनगणना के लिए अपनाई जाती है ठीक वही पद्धति ओबीसी की जनगणना और जाति आधारित जनगणना के लिए अपनाई जाय जिससे सही प्रकार से आंकड़े दर्ज किए जा सके। एससी एसटी की तरह ओबीसी का भी अलग से आप्शन दिया जाय और जिस पद्धति से एससी-एसटी की जनगणना होती है उसी पद्धति से ओबीसी की भी जनगणना किया जाए। राज्यवार आधिकारिक एवं व्यापक मास्टर जाति निर्देशिका तैयार की जाए। प्रत्येक जाति को विशिष्ट कोड प्रदान किया जाए। अनियंत्रित "ओपन कॉलम" व्यवस्था के स्थान पर मानकीकृत विकल्प आधारित प्रणाली अपनाई जाए। असूचीबद्ध एवं स्थानीय जातियों के सत्यापन के लिए स्पष्ट संस्थागत व्यवस्था बनाई जाए। जाति संबंधी डेटा के संग्रह, सत्यापन एवं संकलन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सुरक्षित एवं ऑडिट योग्य बनाया जाए। मांग पूरी नहीं होने पर राष्ट्रीय ओबीसी वर्ग मोर्चा आगामी 2 सितंबर से राष्ट्रव्यापी अनिश्चितकालीन क्रमिक धरना-प्रदर्शन करेगा

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