सीहोर : भागवत कथा के पहले ही दिन पंडाल पड़े छोटे, सड़कों और गलियों तक पहुंची कथा की गूंज - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 20 सितंबर 2026

सीहोर : भागवत कथा के पहले ही दिन पंडाल पड़े छोटे, सड़कों और गलियों तक पहुंची कथा की गूंज

  • अग्रवाल महिला मंडल की सात दिवसीय भागवत कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब, आज 30 फीट से अधिक बढ़ाया जाएगा पंडाल
  • पंडित प्रदीप मिश्रा बोले- सच्चा विश्वास और समर्पण मनुष्य को हर मुश्किल परिस्थिति से सहजता से बाहर निकाल लेता है

Bhagwat-katha-sehore
सीहोर। शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में अग्रवाल महिला मंडल द्वारा आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के पहले ही दिन श्रद्धालुओं की ऐसी भीड़ उमड़ी कि कथा के लिए लगाए गए पंडाल छोटे पड़ गए। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडाल के बाहर सड़क, गली और आसपास उपलब्ध स्थानों पर बैठकर कथा का श्रवण करते नजर आए। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जैसे-जैसे कथा का समय नजदीक आया, धर्मशाला परिसर और आसपास के क्षेत्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती चली गई।भादों माह में पिछले 27 वर्षों से अग्रवाल महिला मंडल द्वारा आयोजित की जा रही यह भागवत कथा शहर की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण आयोजन बन चुकी है। इस वर्ष यह आयोजन 27वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। कथा को लेकर शहर के विभिन्न महिला मंडलों और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। वर्षों से इस व्यास पीठ से लगातार कथा का आयोजन होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु इससे भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। आयोजन की खास बात यह है कि वर्षों से कथा का यह क्रम बिना किसी विराम के जारी है।


श्री सत्यनारायण मंदिर से निकली शोभायात्रा, पुष्प वर्षा से हुआ स्वागत

Bhagwat-katha-sehore
सात दिवसीय भागवत कथा का शुभारंभ रविवार को सादगीपूर्ण वातावरण में शोभायात्रा के साथ किया गया। शोभायात्रा शहर के श्री सत्यनारायण मंदिर से प्रारंभ होकर खजांची लाइन स्थित श्रीजी मंदिर पहुंची। इसके बाद यात्रा कथा स्थल अग्रवाल धर्मशाला पहुंची। शोभायात्रा के मार्ग में क्षेत्रवासियों ने श्रद्धा के साथ पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। धार्मिक ध्वज और भक्ति के वातावरण के बीच निकली शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कथा स्थल पहुंचने के बाद विधिवत भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा के पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से आयोजन स्थल पर जगह कम पड़ गई। पंडाल के अंदर स्थान नहीं मिलने पर श्रद्धालु बाहर सड़क और आसपास की गलियों में बैठकर कथा सुनते रहे। कई श्रद्धालुओं ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से कथा का श्रवण किया।


सैकड़ों किलोमीटर दूर से पहुंचे श्रद्धालु

भागवत कथा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज से भी लोग कथा सुनने पहुंचे। बाहर से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पंडित प्रदीप मिश्रा के दर्शन और कथा का श्रवण करने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए हैं। कथा स्थल पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह और प्रसन्नता के भाव नजर आए। श्रद्धालु पूरे भाव के साथ कथा का श्रवण करते रहे। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, पंडाल के साथ-साथ बाहर बैठे श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। अग्रवाल महिला मंडल की अध्यक्ष रुकमणी रोहिला ने बताया कि पहले दिन श्रद्धालुओं की संख्या उम्मीद से अधिक रही। श्रद्धालुओं को कथा सुनने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पंडाल का विस्तार किया जा रहा है। एलईडी स्क्रीन भी बढ़ाई जाएगी, ताकि बाहर बैठने वाले श्रद्धालु भी सहजता से कथा का श्रवण कर सकें।


सच्चा विश्वास और समर्पण हर मुश्किल से निकाल देता है- पंडित प्रदीप मिश्रा

भागवत कथा के प्रथम दिन अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सच्चा विश्वास और समर्पण मनुष्य को हर मुश्किल परिस्थिति से सहजता से बाहर निकाल लेता है। भागवत कथा अनादि काल से भक्तों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र रही है। इसके माध्यम से भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम की भावना बढ़ती है। शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को सात दिनों तक भागवत कथा का श्रवण कराया था। राजा परीक्षित ने भी पूरे भाव के साथ कथा को सुना और उसका मनन किया। भागवत कथा की महिमा ऐसी है कि आज भी श्रद्धालु इसे सुनने के लिए उत्सुक रहते हैं और कथा स्थल तक खिंचे चले आते हैं। पंडित मिश्रा ने कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का सुमिरन करता है, भगवान उसके अंत:करण में प्रकट होते हैं। भगवान को छल-कपट प्रिय नहीं है। उन्हें निष्कपट, सरल और सहज मन वाले लोग प्रिय होते हैं। इसलिए भगवान के प्रति मनुष्य को सहज रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति में अपनी बुद्धि का अहंकार नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए।


भक्ति में सरलता और निष्कपट भाव जरूरी

कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं से कहा कि भगवान के प्रति भक्ति में दिखावा नहीं होना चाहिए। मनुष्य को सरल और सहज भाव से भगवान का स्मरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मन में विश्वास और समर्पण होता है, तब कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति को आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है। भागवत कथा के संदेश को केवल सुनने तक सीमित न रखते हुए उसे अपने जीवन में उतारने की बात कही। कथा के दौरान श्रद्धालु एकाग्र होकर उनके विचारों को सुनते रहे।


पहले दिन ही छोटे पड़े पंडाल, आज फिर होगा विस्तार

भागवत कथा के पहले दिन ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए आयोजन स्थल पर लगाए गए पंडाल छोटे पड़ गए। स्थिति को देखते हुए अग्रवाल महिला मंडल ने कथा स्थल के पास 30 फीट से अधिक अतिरिक्त पंडाल लगाने की व्यवस्था की है। इसके अलावा एलईडी स्क्रीन की संख्या भी बढ़ाई जाएगी, ताकि बाहर बैठने वाले श्रद्धालुओं को कथा सुनने और देखने में सुविधा मिल सके। आयोजकों के अनुसार सोमवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसके मद्देनजर व्यवस्थाओं को और विस्तार दिया जा रहा है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग मिल रहा है।


27 वर्षों से जारी है आस्था का यह सिलसिला

अग्रवाल महिला मंडल द्वारा भादों माह में आयोजित होने वाली भागवत कथा पिछले 27 वर्षों से लगातार श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है। शहर की धार्मिक परंपरा में इस कथा का अपना विशेष स्थान है। हर वर्ष महिला मंडलों और क्षेत्रवासियों को इस आयोजन का इंतजार रहता है। यह केवल कथा का आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही श्रद्धा, भक्ति और अपनेपन की परंपरा है। कथा स्थल पर पहुंचने वाले श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन से जुड़कर स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं। पहले ही दिन उमड़ी भीड़ ने आयोजन के प्रति लोगों की आस्था को एक बार फिर सामने रखा। सात दिनों तक चलने वाली कथा में आगामी दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

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