बिहार में महागठबंधन की तत्कालीन सरकार ने आरक्षण के दायरे को 65% तक बढाने के लिए प्रयास किया लेकिन केंद्र की एनडीए सरकार की उदासनीता के कारण यह मामला कोर्ट में चला गया जबकि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार इसे नौवीं अनुसूची में शामिल करवा सकती थी लेकिन पिछड़ों के लिए इस सरकार में कोई हमदर्दी नहीं है। बिहार में एनडीए की सरकार बनते ही जातिगत जनगणना के अनुशंसा को भाजपा नितीश ने ठन्डे बसते में डाल दिया और पिछड़ों को उनका वाजिब हक़ नहीं मिल सका, जिसके लिए हमारे नेता राहुल गाँधी जी ने संघर्ष किया था। तभी हमने वादा किया था कि हमारी सरकार जहाँ भी दो तिहाई बहुमत से बनेगी हम इसे आगे बढ़ाएंगे और आज तेलंगाना में हमारी सरकार का जातिगत जनगणना का मॉडल राष्ट्रीय नजीर है। आज देश में जब चारों ओर छात्र अपने हक़ की मांग कर रहे हैं ऐसे में जातिगत जनगणना को लेकर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी यू टर्न लेते हुए इसे कराने की बात हमारे नेता राहुल गाँधी जी और मल्लिकार्जुन खरगे जी के दबाव में मान गए हैं लेकिन कई विसंगतियां इस जनगणना के प्रश्नावली में पाई गयी हैं जो सरकार की मंशा को संदिग्ध साबित करती है। पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों में 1 सितंबर से यह काम शुरू भी हो चुका है, जबकि देश के बाकी हिस्सों में अगले साल फरवरी में जनगणना की शुरुआत होगी ।
पटना, शनिवार, 5 सितम्बर, (रजनीश के झा) । केंद्र की एनडीए सरकार, जातिगत जनगणना में जान बूझकर अड़ंगा डालकर ओबीसी वर्ग की वास्तविक भागीदारी सामने नहीं आने देना चाहती इसीलिए प्रश्नावली में त्रुटी कर जातिगत जनगणना के वास्तविक लक्ष्यों को भटकाने का प्रयास कर रही है। ओबीसी और इबीसी वर्गों के वाजिब हकों के लिए एनडीए सरकार गंभीर नहीं है, ये बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के मुख्यालय सदाकत आश्रम के स्व. राजीव गाँधी सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एआईसीसी के गोवा, दमन दीव और दादर नगर हवेली के प्रभारी और महाराष्ट्र के पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व गृह मंत्री रहें माणिकराव ठाकरे ने कही। एआईसीसी के वरिष्ठ नेता माणिकराव ठाकरे ने कहा कि देश में जातिगत जनगणना पर कुंडली मारकर बैठी एनडीए सरकार और इनके मुखिया नरेंद्र मोदी ने ओबीसी ईबीसी वर्ग की भागीदारी के अनुरूप हिस्सेदारी को रोकने का कुचक्र रचा है जिसे कांग्रेस पार्टी और हमारे नेता राहुल गांधी व मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद में उजागर करने का काम किया है। केंद्र की एनडीए सरकार लगातार जातिगत जनगणना की खिलाफत करते आयें हैं। बिहार में जब हमारी महागठबंधन की सरकार थी तो कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी जी ने राज्य की अपनी ही सरकार पर दबाव देकर पिछड़ों को उनकी संख्या के आधार पर भागीदारी सुनिश्चित कराने हेतु जातिगत जनगणना पर जोर दिया और बिहार में जातिगत जनगणना की शुरुआत हुई। साथ ही हमारी तेलंगाना सरकार ने बेहतर तरीके से जातिगत जनगणना किया जो नाजिर के तौर पर केंद्र सरकार इस्तेमाल कर सकती है।

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