कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री के दबाव के कारण ऐसा हुआ है और ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी को खुद नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और इससे योग्य नागरिकों के मताधिकार पर असर पड़ने की आशंका है। खरगे ने कहा कि लोकतंत्र में हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित होना चाहिए और प्रत्येक वोट की निष्पक्ष गणना होनी चाहिए। उन्होंने संविधान सभा में डॉ. बी. आर. आंबेडकर द्वारा मताधिकार को लोकतंत्र की ‘‘सबसे मौलिक चीज’’ बताए जाने का उल्लेख किया और कहा कि मतदाता सूची में शामिल किए जाने वाले किसी योग्य व्यक्ति को किसी अधिकारी की मनमर्जी के आधार पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए। खरगे ने कहा, "कांग्रेस ने देश में ऐसी संस्थाओं के निर्माण और उन्हें स्वतंत्र एवं अधिकार-संपन्न बनाने में भूमिका निभाई है, लेकिन आज इन संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।" उन्होंने कहा, ‘‘हमारे सवाल इन संस्थाओं को कमजोर करने के इरादे से नहीं होते। हम तो चाहते हैं कि चुनाव आयोग इतना मजबूत और विश्वसनीय हो कि सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों उसके निर्णयों पर समान भरोसा करें।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी की ओर से पांच मांगें भी रखीं। इनमें मतदाता सूची में होने वाले बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक करना, जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं उन्हें इसकी सूचना और अपील का अवसर देना, राजनीतिक दलों को मतदाता सूची से संबंधित आवश्यक डेटा समय पर उपलब्ध कराना, गंभीर विसंगतियों के मामलों में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों और फैसलों में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।
खरगे ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश के मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दे उठाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कर्नाटक तथा हरियाणा और महाराष्ट्र में मतदाता आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए थे। खरगे ने दावा किया कि राहुल गांधी ने "डुप्लीकेट" मतदाताओं, संदिग्ध पतों, एक ही पते पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम और फॉर्म-6 से जुड़ी प्रविष्टियों को लेकर दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से इन मुद्दों को लेकर ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर किए गए प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी चुनाव को केवल जीत या हार की लड़ाई के रूप में नहीं देखती। उनके मुताबिक, चुनाव आते-जाते रहते हैं और सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति एक आम मतदाता है, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या सत्ता में बैठा नेता नहीं।’’ खरगे ने आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी कि किसी मतदाता का अधिकार न छीना जाए और हर व्यक्ति का वोट सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनावों से ही जनता का चुनाव प्रक्रिया में विश्वास बना रह सकता है और तभी देश का भविष्य सुरक्षित तथा लोकतंत्र मजबूत रहेगा। खरगे ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी निशाना साधते हुए नोटबंदी का जिक्र किया और आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का सबसे अधिक असर गरीबों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि गरीबों के पास अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सबसे बड़ी ताकत उनका वोट है और कांग्रेस उसे ‘‘किसी हाल में छिनने नहीं देगी।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए ‘‘सड़क से संसद तक’’ अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

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