सीहोर : कांवड़ यात्रा का सिलसिला जारी, सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक आस्था का सफर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 1 सितंबर 2026

सीहोर : कांवड़ यात्रा का सिलसिला जारी, सीवन नदी से कुबेरेश्वरधाम तक आस्था का सफर

  • सावन बीता, लेकिन शिवभक्ति की रफ्तार कायम, जलगांव से आई महिला मंडल ने 11 किमी पैदल चलकर किया अभिषेक

Kubereshwar-dham-kanwar-sehore
सीहोर। सावन मास के समापन के बाद भी शहर के सीवन नदी तट से कुबेरेश्वरधाम तक शिवभक्ति का क्रम लगातार जारी है। रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु सीवन नदी से पवित्र जल लेकर करीब 11 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा कर कुबेरेश्वरधाम पहुंच रहे हैं। मंगलवार को महाराष्ट्र के जलगांव से आई महिला मंडल की श्रद्धालुओं ने भी सीवन नदी के तट से कांवड़ में जल भरा और 11 किलोमीटर पैदल चलकर धाम पहुंचीं। यहां उन्होंने विधि-विधान से भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। सावन समाप्त होने के बावजूद धाम पर श्रद्धालुओं की भीड़ बनी हुई है। मंगलवार को भी सैकड़ों की संख्या में भक्त कुबेरेश्वरधाम पहुंचे। मंदिर परिसर में सुबह से ही दर्शन-पूजन का क्रम चलता रहा। श्रद्धालुओं के लिए विठलेश सेवा समिति की ओर से जारी भंडारे में पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित सेवादारों ने भोजन प्रसादी का वितरण किया।


आडंबर नहीं, साफ दिल से मिलते हैं भोलेनाथ-पंडित प्रदीप मिश्रा

शाम की आरती के दौरान अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान को पाने के लिए आडंबर की आवश्यकता नहीं है, इसके लिए साफ दिल ही काफी है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या से अधिक जरूरी सच्ची श्रद्धा और सरल भाव है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जितना सरल होता जाएगा, वह भगवान शिव के उतना ही करीब पहुंचता जाएगा। भक्ति में दिखावे की आवश्यकता नहीं है। भगवान शिव भाव के भूखे हैं और सच्चे मन से की गई आराधना उन्हें प्रिय है। यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं ने कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के कारण भगवान शिव की कृपा से सीहोर की पहचान देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में बनी है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु नियमित रूप से कुबेरेश्वरधाम पहुंचते हैं। यही कारण है कि धाम पर वर्षभर मेले जैसा भक्तिमय वातावरण बना रहता है।


आधुनिक मशीनों से रोज तैयार होता श्रद्धालुओं का भोजन

कुबेरेश्वरधाम की अन्नपूर्णा रसोई में श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी तैयार करने का काम लगातार जारी है। यहां भोजनशाला में सेवा करने वाले धर्मेंद्र भावसार ने बताया कि सावन माह के दौरान प्रतिदिन सवा लाख से अधिक श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी तैयार की जाती थी। इसके लिए आधुनिक मशीनों की मदद से बड़े स्तर पर भोजन तैयार कर श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता था। उन्होंने बताया कि विगत 25 अगस्त को आयोजित भव्य कांवड़ यात्रा के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए बड़े स्तर पर भोजन प्रसादी तैयार करने और वितरण की व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए बड़ी संख्या में सेवादारों ने अपनी सेवाएं दीं। करीब 15 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी का निर्माण और वितरण की व्यवस्था सफल रही।


जन्माष्टमी पर मुरली मनोहर मंदिर में दही हांडी और जन्मोत्सव

विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि हर साल की तरह इस वर्ष भी 4 सितंबर को कुबेरेश्वरधाम स्थित मुरली मनोहर मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व सादगी और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर रात्रि 11 बजे दही हांडी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम होंगे। मंदिर परिसर में श्रद्धालु भगवान मुरली मनोहर के दर्शन कर जन्मोत्सव में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी को लेकर मंदिर परिसर में आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दर्शन और धार्मिक आयोजन की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।


भादो में भी कांवड़ियों के कदम नहीं थमे

सावन के बाद भादो में भी कांवड़ यात्रा का क्रम जारी रहने से सीवन नदी का तट और कुबेरेश्वरधाम के बीच का मार्ग शिवभक्ति से सराबोर है। महाराष्ट्र सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर पवित्र जल लेकर भगवान शिव को अर्पित कर रहे हैं। कांवड़ यात्रियों के मुख से हर-हर महादेव, बम-बम भोले और जय भोलेनाथ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। कई महिला मंडल और युवा समूह भी सामूहिक रूप से कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि लंबी दूरी की यह यात्रा उनके लिए केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति विश्वास और समर्पण का अवसर है। कुबेरेश्वरधाम पर सावन के बाद भी जारी यह आस्था का सफर बताता है कि शिवभक्ति किसी एक माह तक सीमित नहीं है। श्रद्धालुओं के लिए सीवन नदी से जल लेकर भगवान शिव के दरबार तक पहुंचना आज भी आस्था, सेवा और समर्पण की जीवंत परंपरा बना हुआ है।

कोई टिप्पणी नहीं: