मधुबनी : ‘मिशन कायाकल्प मधुबनी’ से शिक्षा व्यवस्था में आएगा व्यापक बदलाव : डीएम - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

रविवार, 20 सितंबर 2026

मधुबनी : ‘मिशन कायाकल्प मधुबनी’ से शिक्षा व्यवस्था में आएगा व्यापक बदलाव : डीएम

  • स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, माँडर्न लेबोरेटरी से लेकर मूलभूत सुविधाओं से सशक्त होगी समग्र शिक्षा व्यवस्था
  • शिक्षा के क्षेत्र में नई इबारत लिख रहा मधुबनी : डीएम ने जिले मे शिक्षा का अलख जगाने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों एवं आम नागरिकों से जागरूक होने, दूसरों को प्रेरित करने का किया आह्वान

Mission-kayakalp-madhubani
मधुबनी, 20 सितंबर, (रजनीश के झा) । जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़,  आधुनिक, डिजिटल एवं समयानुकूल बनाने की दिशा में जिलाधिकारी, मधुबनी द्वारा व्यापक स्तर पर सतत एवं प्रभावी पहल की जा रही है। उन्होंने शिक्षा के मंदिर मे शिक्षकों की भूमिका तथा समाज मे शिक्षकों की महिमा को अनुपम,अप्रतिम एवं अद्वितीय बताते हुए अभिभावकों एवं आम नागरिकों को स्वयं जागरूक होने तथा दूसरों को प्रेरित करने का आह्वान किया ताकि जिलांतर्गत घर घर मे शिक्षा का अलख जगे तथा शिक्षा का मंदिर वास्तव मे शिक्षण का केंद्र बन सके। यह बातें जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा ने प्राइवेट स्कूल एवं चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन मधुबनी के तत्वावधान में आयोजित शिक्षाविद सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि पद से संबोधित करते हुए कही। उन्होंने विद्यालयों को संरचनात्मक एवं गुणात्मक रूप से सुदृढ एवं आधुनिक बनाने के निमित्त ‘मिशन कायाकल्प मधुबनी’ की कार्ययोजना को कार्यान्वित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके माध्यम से सरकारी विद्यालयों में आधारभूत संरचना को मजबूत करने से लेकर आधुनिक डिजिटल शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार तक एक समग्र कार्ययोजना पर कार्य किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य विद्यालयों को केवल बेहतर भौतिक संसाधनों से सुसज्जित करना ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए ऐसा अनुकूल शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जहां वे आधुनिक तकनीक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अपने भविष्य को नई दिशा दे सकें। जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा ने जिले के सभी अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों से शिक्षा के प्रति जागरूक होने तथा शिक्षा व्यवस्था में सतत सुधार की प्रक्रिया में सक्रिय सहभागी बनने एवं सहयोग करने का आह्वान किया । उन्होंने कहा कि किसी भी समाज और राष्ट्र के निर्माण की मजबूत नींव शिक्षा से तैयार होती है। शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व, विचार, संस्कार, अनुशासन और भविष्य को आकार देने का महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों के भविष्य के निर्माता हैं। समाज एवं राष्ट्र के नवनिर्माण में उनका योगदान अप्रतिम, अनुपम एवं अद्वितीय है। उन्होंने गुरु की महिमा को रेखांकित करते हुए शिक्षकों को वंदनीय एवं पूजनीय बताया।


शिक्षकों से कर्तव्यपरायणता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर

जिलाधिकारी ने शिक्षकों को उनके कर्तव्य एवं जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए कहा कि विद्यालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे ही कल देश के भविष्य होंगे। उन्हें बेहतर शिक्षा, संस्कार, मार्गदर्शन एवं अवसर प्रदान कर ही एक सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र की नींव रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल तकनीक और आधुनिक शिक्षण पद्धतियां शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध करा रही हैं। ऐसे में बच्चों को केवल पारंपरिक पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें आधुनिक तकनीक, डिजिटल संसाधनों और नये शिक्षण माध्यमों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।


तीन श्रेणियों में विद्यालयों का वर्गीकरण, जरूरत के अनुरूप होगी कार्ययोजना

जिलाधिकारी ने मिशन कायाकल्प मधुबनी’ एवं "आपका विद्यालय, आपका स्वाभिमान" के तहत जिले के सरकारी विद्यालयों में किए जा रहे सुधारात्मक प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि विद्यालयों की वर्तमान स्थिति एवं आवश्यकताओं के आधार पर उनका वर्गीकरण करते हुए अलग-अलग स्तर पर कार्ययोजना तैयार की गई है। इससे विद्यालयों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप संसाधनों का विकास एवं शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा। प्रथम श्रेणी में ऐसे विद्यालयों को चिन्हित किया गया है, जो आधारभूत संरचना की दृष्टि से क्रिटिकल श्रेणी में आते हैं। ऐसे विद्यालयों में भवन निर्माण एवं आवश्यक आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। द्वितीय श्रेणी में वैसे विद्यालयों को शामिल किया गया है, जहां बच्चों के लिए जरूरी आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इन विद्यालयों में बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था, पेयजल, पंखा, शौचालय सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यालयों को बच्चों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित, सुविधाजनक एवं अनुकूल वातावरण के रूप में विकसित करना है। तृतीय श्रेणी में ऐसे विद्यालयों को चिन्हित किया गया है, जहां आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों के विकास की संभावना है। ऐसे विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, ऑनलाइन क्लास, प्रयोगशाला सहित आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं को विकसित करने पर बल दिया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को बदलते समय की आवश्यकता के अनुरूप तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने तथा शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायता मिलेगी।


प्रशासन के साथ समाज की सहभागिता से बदलेगा शिक्षा का परिदृश्य

जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में स्थायी एवं व्यापक बदलाव केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए शिक्षकों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों एवं समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल सरकारी संस्थान नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं आम नागरिकों से जिले के ‘शिक्षा के मंदिरों’ में सकारात्मक बदलाव लाने तथा जन-जन में शिक्षा की अलख जगाने में सक्रिय  एवं प्रभावशाली भूमिका निभाने की अपील की। जिलाधिकारी ने अभिभावकों से विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि एवं चेतना जागृत करें। बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के साथ-साथ उनकी पढ़ाई, उपस्थिति एवं शैक्षणिक प्रगति पर भी ध्यान दें। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन की पहल के साथ शिक्षक की कर्तव्यपरायणता, अभिभावकों की जागरूकता और समाज की सहभागिता जुड़ेगी है, तब शिक्षा व्यवस्था में व्यापक एवं स्थायी परिवर्तन  होगा। उन्होंने कहा कि ‘मिशन कायाकल्प मधुबनी’ केवल विद्यालयों के भवन एवं सुविधाओं के कायाकल्प तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य बच्चों के भविष्य और जिले की शिक्षा व्यवस्था का कायाकल्प करना है। आधारभूत सुविधाओं के साथ आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण एवं सामुदायिक सहभागिता को जोड़कर जिले में शिक्षा के लिए एक मजबूत एवं सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों एवं शिक्षाविदों का सम्मान न केवल उनके योगदान के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है, बल्कि इससे शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी सदर श्री चंदन कुमार झा, उपनिदेशक सह जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्री प्रमोद कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी योजना एवं लेखा, विद्यालय संघ के अध्यक्ष श्री देवानंद झा सहित जिले के विभिन्न निजी विद्यालयों के शिक्षकगण एवं छात्रगण उपस्थित थे।

कोई टिप्पणी नहीं: