दिल्ली : मऊ के पूर्व पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए : सुप्रीम कोर्ट - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 27 सितंबर 2026

दिल्ली : मऊ के पूर्व पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने एक आपराधिक मामले की सुनवाई में उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘‘लापरवाह रवैये’’ पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को मऊ जिले में 2023 से अब तक तैनात रहे पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि 2017 में दर्ज मामले में अभियोजन पक्ष के 54 गवाह में से अब तक केवल दो की गवाही हुई है, जबकि छह आरोपियों के खिलाफ मार्च 2023 में आरोप तय कर दिए गए थे। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के 14 वर्षीय बेटे का 27 सितंबर 2017 को अपहरण कर लिया गया था और आज तक न तो उसका पता चला है और न ही उसके अवशेष मिले हैं। अदालत ने 21 सितंबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘इसे देखकर हमें इस बात पर कोई संदेह नहीं है कि गवाहों को पेश करने के लिए जिम्मेदार अभियोजन पक्ष ने आपराधिक मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत के प्रति अपने कर्तव्य के निर्वहन में पूरी तरह ढिलाई बरती है।’’ शीर्ष अदालत ने कहा कि गवाहों को अदालत के समक्ष पेश करना मूल रूप से जांच एजेंसी की जिम्मेदारी है। पीठ ने कहा, ‘‘हम इस बात से स्तब्ध हैं कि अभियोजन पक्ष ने तीन साल से अधिक समय तक गवाहों को अदालत में पेश करना सुनिश्चित नहीं किया और आज की तारीख तक केवल दो गवाहों की गवाही हुई है।’’ पीठ ने कहा कि उसके 10 अगस्त के आदेश के अनुपालन में मऊ के मौजूदा पुलिस अधीक्षक अदालत में उपस्थित हुए और उन्होंने 29 अगस्त की तारीख वाला एक हलफनामा दाखिल किया। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘अदालत ने जब पूछा कि सभी छह आरोपियों के खिलाफ 27 मार्च 2023 को आरोप तय किए जाने के बाद से अब तक कितने गवाहों की गवाही हुई है तो जवाब मिला कि अभियोजन पक्ष के 54 गवाहों में से केवल दो की गवाही हुई है।’’ पीठ ने कहा कि मार्च 2023 में आरोप तय हो जाने के बावजूद अभियोजन एजेंसी ने मुकदमे की सुनवाई पूरी कराने को लेकर ‘‘तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई।’’


अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए हम उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश देते हैं कि मऊ जिले में 2023 से अब तक पुलिस अधीक्षक के पद पर रहे अधिकारियों के खिलाफ, विशेष रूप से मुकदमों की सुनवाई से जुड़े अपने दायित्व के निर्वहन में इस तरह की लापरवाही बरतने के लिए विभागीय कार्यवाही शुरू की जाए। यह कार्यवाही आज से दो सप्ताह के भीतर शुरू की जाए।’’ पीठ ने कहा, ‘‘अदालत यह स्पष्ट करती है कि यदि उसे पता चलता है कि 2023 से मऊ जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर रहे अधिकारियों को केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए आरोप ज्ञापन जारी किए गए हैं, तो वह ऐसे ज्ञापन जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेगी।’’ मामले में आगे की सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख तय करते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि राज्य के मुख्य सचिव द्वारा व्यक्तिगत रूप से सत्यापित हलफनामा अगली सुनवाई से पहले दाखिल किया जाए जिसमें की गई कार्रवाई का विवरण हो। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मई 2025 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर 2017 में मऊ में दर्ज मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या किसी अन्य एजेंसी को सौंपने का अनुरोध किया है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के वकील की इस दलील पर गौर करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया था कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है।

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