सीहोर : माता-पिता, गुरु और परमात्मा का हर समय सम्मान करना चाहिए : उपाध्यक्ष विवेक रुठिया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 14 सितंबर 2026

सीहोर : माता-पिता, गुरु और परमात्मा का हर समय सम्मान करना चाहिए : उपाध्यक्ष विवेक रुठिया

  • भव्य भोजन प्रसादी, भजन-कीर्तन के साथ हुआ धार्मिक आयोजन

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सीहोर। माता-पिता, गुरु और परमात्मा का हमें हर समय सम्मान करना चाहिए। बुजुर्ग हमारे लिए सदैव सम्माननीय हैं और उनका आशीर्वाद जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। आज की युवा पीढ़ी को अपने संस्कारों और परिवार के बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदारियों को समझते हुए उनके सम्मान और सेवा को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। यह बात शहर के सैकड़ाखेड़ी स्थित संकल्प वृद्धाश्रम में आयोजित धार्मिक एवं सेवा कार्यक्रम के दौरान संस्कार मंच के उपाध्यक्ष एवं समाजसेवी विवेक रुठिया ने कही। समाजसेवी विवेक रुठिया द्वारा अपने पिता स्वर्गीय पिताश्री मानकचंद्र रुठिया की स्मृति में पिछले कई वर्षों से संकल्प वृद्धाश्रम में भव्य भोजन प्रसादी का आयोजन किया जाता है। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष भी वृद्धाश्रम में श्रद्धा और सेवा भावना के साथ भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वृद्धजनों को भोजन प्रसादी कराई गई और सभी के सुख, स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की गई। विवेक रुठिया ने कहा कि जीवन में धन-संपत्ति से अधिक महत्वपूर्ण संस्कार और सेवा भावना है। माता-पिता ने हमें जीवन दिया और गुरु हमें सही मार्ग दिखाते हैं, जबकि परमात्मा के प्रति श्रद्धा हमें जीवन में सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने माता-पिता की सेवा करने के साथ गुरुजनों एवं बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रम में आकर बुजुर्गों के बीच समय बिताने और उनकी सेवा करने से मन को आत्मिक संतोष मिलता है। अपने पिता की स्मृति में कई वर्षों से यहां भोजन प्रसादी का आयोजन करने का उद्देश्य भी सेवा और संस्कार की इसी भावना को आगे बढ़ाना है। इस अवसर पर श्रद्धा भक्ति सेवा समिति की ओर से बाबू सिंह, सनातन सेना के प्रदेश सचिव पवन केवट, आयुष गुप्ता आदि ने समाजसेवी विवेक रुठिया एवं अग्रवाल महिला मंडल की वरिष्ठ पदाधिकारी श्रीमती ज्योति रुठिया का स्वागत एवं सम्मान किया।


माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा धर्म-श्रीमती ज्योति रुठिया

इस अवसर पर श्रीमती ज्योति रुठिया ने कहा कि आज भगवान गणेश की चतुर्थी के साथ महिलाओं के लिए कठिन व्रतों में शामिल हरतालिका तीज का पावन पर्व भी है। उन्होंने सभी को हरतालिका तीज की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में माता-पिता की सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमें अपने माता-पिता की सेवा निरंतर करते रहना चाहिए। उनके जीवन के अनुभव हमारे लिए मार्गदर्शन का काम करते हैं। परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करना हमारी संस्कृति और संस्कारों की पहचान है। उन्होंने महिलाओं को हरतालिका तीज की शुभकामनाएं देते हुए भगवान शिव और माता पार्वती से सभी परिवारों में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।


भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण

कार्यक्रम के दौरान सुबह भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। भजनों की प्रस्तुति से वृद्धाश्रम का वातावरण भक्तिमय हो गया। वृद्धजनों सहित उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों का आनंद लिया और भगवान का स्मरण किया। इस अवसर पर पंडित गणेश शर्मा, उज्जैन स्थित शनि मंदिर के पुजारी सचिन त्रिवेदी एवं पंडित सुनील पाराशर ने धार्मिक प्रवचन दिए। उन्होंने सनातन संस्कृति में माता-पिता, गुरु, बुजुर्गों और सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव जीवन की सार्थकता केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सेवा और दूसरों के जीवन में खुशियां बांटने में है। कार्यक्रम में पहुंचे संतों एवं विद्वानों का संकल्प वृद्धाश्रम की ओर से आनंद व्यास, धीरज वाधवानी, रितेश माहेश्वरी, बीपी शर्मा, अजय मीना, आकाश राय, कमलेश राय आदि ने स्वागत किया।


वृद्धजनों के बीच मनाया सेवा का पर्व

भोजन प्रसादी एवं धार्मिक आयोजन के दौरान वृद्धाश्रम में आत्मीयता और अपनत्व का वातावरण देखने को मिला। आयोजकों ने वृद्धजनों के साथ समय बिताया और उनकी कुशलक्षेम जानी। सभी ने बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त किया। समाज में सेवा और संस्कार की भावना को मजबूत करने के लिए इस प्रकार के आयोजन निरंतर होते रहना चाहिए। अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा करने के साथ जरूरतमंद एवं निराश्रित लोगों की मदद करना ही सच्चे अर्थों में मानव सेवा है। कार्यक्रम का समापन प्रसादी वितरण एवं सभी के सुख-समृद्धि की कामना के साथ हुआ।

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