उन्होंने कहा कि 74 रुपये का एक इंजेक्शन 4,980 रुपये में मिल रहा है और उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों से 67 गुना ज्यादा वसूली की जा रही है। रमेश ने कहा कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की एक दवा की 21 दिन की खुराक की कीमत करीब 58,000 रुपये है, जिससे सालाना खर्च करीब 10 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। रमेश ने कहा कि सवाल सिर्फ एक दवा की कीमत का नहीं, बल्कि पिछले 12 साल से सत्ता में बैठी सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं का है। कांग्रेस महासचिव का कहना है कि पेटेंट कानून की धाराओं 92 और 100 में सार्वजनिक हित तथा सरकारी उपयोग के लिए प्रावधान मौजूद हैं। रमेश ने केरल उच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पेटेंट अधिनियम की धारा 100 के तहत सरकार पेटेंट वाली जीवनरक्षक दवा का उत्पादन कर सकती है या उसके अधिकृत उत्पादन की व्यवस्था करके उसे जरूरतमंद मरीजों को गैर-वाणिज्यिक आधार पर उपलब्ध करा सकती है। उन्होंने पूछा कि जब कानून में प्रावधान मौजूद है और उच्च न्यायालय ने भी इसका रास्ता स्पष्ट किया है, तो जीवनरक्षक दवाएं अब भी मरीजों की पहुंच से बाहर क्यों हैं। रमेश ने कहा, "प्रधानमंत्री जी, मरीजों के लिए सस्ती दवा कब सुनिश्चित होगी?नहीं तो जैसा आपने स्वयं कहा था कि झोला उठाने का समय जल्दी आ रहा है।"
नई दिल्ली। कांग्रेस ने सोमवार को दावा किया कि केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण देशभर में मरीजों पर महंगी दवाओं का बोझ बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के झोला उठाकर जाने का समय जल्दी आ रहा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह सवाल भी किया कि जब कानून मरीजों को राहत देने का रास्ता देता है, तो उस पर आगे बढ़ने में देरी क्यों हो रही है और मरीजों के लिए सस्ती दवा कब सुनिश्चित की जाएगी? उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण देशभर में मरीजों पर महंगी दवाओं का बोझ बढ़ रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नीरो की तरह अपनी अलग ही डफली बजाने में व्यस्त हैं।" पार्टी महासचिव ने दावा किया कि देश में मरीजों से दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर भारी कीमत वसूली जा रही है।

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