मधुबनी, 23 अक्टूबर, (रजनीश के झा) । सुखेत में चल रहे 15 दिवसीय समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को मृदा परीक्षण तथा फसलों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षणों और उनके प्रबंधन की जानकारी दी गई। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, झंझारपुर के सह-प्राध्यापक डॉ. संजय कुमार ने मृदा परीक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी। वहीं, केंद्र के तकनीकी अधिकारी आशीष राय ने “आवश्यक पोषक तत्वों की कमी : प्रभाव एवं लक्षण” विषय पर किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक एवं आयरन जैसे पोषक तत्वों की कमी से फसलों की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित होता है। उन्होंने पत्तियों का पीला पड़ना, किनारों का झुलसना तथा बैंगनीपन जैसे लक्षणों से पोषक तत्वों की कमी पहचानने के व्यावहारिक तरीके बताए। श्री राय ने कहा कि समय पर पहचान, मृदा परीक्षण और संतुलित पोषण प्रबंधन से फसल की उत्पादकता बढ़ाने तथा खेती की लागत कम करने में मदद मिलती है। प्रशिक्षण के दौरान किसानों के प्रश्नों का वैज्ञानिक समाधान भी बताया गया।
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
मधुबनी : सुखेत में किसानों की दी गई मृदा परीक्षण और पोषण की जानकारी
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