- दिनभर निर्जला व्रत, शाम को सोलह शृंगार और चंद्रदर्शन की आस में टिकी रहीं निगाहें
- बादलों और बारिश ने सुहागिनों के इंतजार को बनाया लंबा, पति की दीर्घायु की कामना के बीच मौसम ने परंपरा के निर्वाह में डाली बाधा
आस्था, प्रेम और समर्पण के प्रतीक करवा चौथ पर महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत रखा। सुबह सरगी के साथ शुरू हुआ निर्जला उपवास दिनभर पूजा-पाठ, साज-शृंगार और पारंपरिक रस्मों के साथ आगे बढ़ा। शाम को घरों में करवा माता की पूजा हुई। सुहागिनों ने कथा सुनी और पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य तथा सुखी दांपत्य जीवन की कामना की। पूजा की थालियां सजीं तो मन में एक ही अभिलाषा थी—चांद निकलेगा, अर्घ्य दिया जाएगा और फिर पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत पूरा होगा। लेकिन मौसम ने इस प्रतीक्षा को असाधारण रूप से लंबा कर दिया।
चांद का समय आया, मगर बादलों का पहरा नहीं हटा
करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व है। परंपरा के अनुसार, सुहागिनें चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं। मगर इस बार आसमान में छाए बादलों और लगातार होती बारिश ने इस परंपरा के निर्वाह को मुश्किल बना दिया। चंद्रमा के उदय का समय होने के बावजूद उसके दर्शन नहीं हो सके। महिलाओं की निगाहें कभी छत से आसमान की ओर उठतीं तो कभी बारिश की बूंदों के बीच बादलों के छंटने का इंतजार करतीं। हर गुजरते पल के साथ उम्मीद बनी रही कि शायद मौसम करवट ले और चांद की एक झलक मिल जाए।
सोलह शृंगार पर मौसम की बेरुखी भारी
करवा चौथ की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। बाजारों में खरीदारी, मेहंदी, चूड़ियों और पारंपरिक परिधानों की रौनक के बीच इस पर्व का उत्साह देखते ही बनता है। महिलाओं ने भी पूरे मनोयोग से व्रत की तैयारी की थी। किसी ने लाल जोड़ा पहना तो किसी ने पारंपरिक परिधान में सोलह शृंगार किया। पूजा की थाली में दीप, करवा, अक्षत और मिठाइयां सजाईं। दिनभर भूखे-प्यासे रहकर शाम तक पहुंचीं महिलाओं को उम्मीद थी कि रात चांदनी के साथ उनके व्रत का पारंपरिक समापन होगा। मगर बारिश ने उत्सव की रंगत में खलल डाल दिया।
आस्था कायम, इंतजार में गुजरी रात
करवा चौथ की खूबसूरती केवल चांद देखने और व्रत खोलने की रस्म में नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना में भी निहित है। यही वजह रही कि मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद पर्व के प्रति उत्साह बना रहा। चंद्रदर्शन नहीं होने से व्रत खोलने की विधि को लेकर महिलाओं के सामने असमंजस की स्थिति भी बनी। ऐसी परिस्थितियों में धार्मिक परंपराओं और पारिवारिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। बारिश ने चांदनी रात की रौनक भले ही छीन ली, लेकिन सुहागिनों की आस्था को नहीं डिगा सकी। बादलों से ढके आसमान के नीचे चंद्रमा की प्रतीक्षा इस बार करवा चौथ की सबसे मार्मिक तस्वीर बनकर उभरी। चांद भले ही नजर नहीं आया, लेकिन जीवनसाथी की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य की कामना हर प्रार्थना में बनी रही।

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