सीहोर : कुबेरेश्वरधाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को वितरित की भोजन प्रसादी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 25 अक्टूबर 2026

सीहोर : कुबेरेश्वरधाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को वितरित की भोजन प्रसादी

  • शरद पूर्णिमा पर भगवान शिव, श्रीराम और श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूपों का हुआ विशेष श्रृंगार, पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया सदाचार और कर्तव्यपालन का संदेश

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सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित श्री मुरली मनोहर मंदिर, कुबेरेश्वरधाम में रविवार को शरद पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। पर्व के अवसर पर सुबह से ही धाम में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। विठलेश सेवा समिति की ओर से 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर प्रसादी ग्रहण की और धर्मलाभ प्राप्त किया। पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा। महोत्सव के दौरान अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को कर्तव्यपालन, सदाचार और निस्वार्थ कर्म का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी, निष्ठा और अहंकार रहित भाव से निभाता है, तो उसका कर्म भी भक्ति का स्वरूप बन जाता है। जीवन में केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि अच्छे कर्म, सच्चा आचरण और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता भी आवश्यक है। कर्म के बिना भक्ति अधूरी है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करना चाहिए।


30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को मिली भोजन प्रसादी

शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर कुबेरेश्वरधाम में विठलेश सेवा समिति की ओर से विशाल भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। प्रसादी में खिचड़ी, रोटी-सब्जी, नमकीन और नुक्ती वितरित की गई। समिति के सेवाभावी सदस्यों ने श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से भोजन प्रसादी उपलब्ध कराने में सहयोग किया। इस सेवा कार्य में विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य सेवादार शामिल रहे। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन के साथ भोजन प्रसादी ग्रहण की। धार्मिक आयोजन के साथ सेवा और समर्पण का भाव भी देखने को मिला।


कर्तव्य और सदाचार से ही सार्थक होती है भक्ति

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों से कभी विमुख नहीं होना चाहिए। केवल ईश्वर से सुख और समृद्धि की कामना करने के बजाय अपने आचरण को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में दूसरों के प्रति दया, विनम्रता और सहयोग का भाव रखना भी भक्ति का ही एक रूप है। उन्होंने कहा कि मन में अहंकार और ईर्ष्या रखने से व्यक्ति अपने उद्देश्य से भटक जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सत्य, प्रेम और सदाचार को अपने जीवन में स्थान देना चाहिए। ईश्वर पर विश्वास रखते हुए अपने कर्म करते रहना चाहिए। जब व्यक्ति ईमानदारी से अपने दायित्व निभाता है और दूसरों के हित का ध्यान रखता है, तभी उसके जीवन में भक्ति और आध्यात्मिकता का वास्तविक महत्व दिखाई देता है। पंडित मिश्रा ने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि वे धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपने व्यवहार और कर्मों में भी सकारात्मकता लाएं। अच्छे कर्म, निस्वार्थ सेवा और विनम्रता को जीवन का हिस्सा बनाकर समाज में सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत किया जा सकता है।


शिव के चंद्रमौली, श्रीरामचंद्र और श्रीकृष्णचंद्र स्वरूपों के हुए दिव्य दर्शन

विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि शरद पूर्णिमा के अवसर पर रविवार शाम चार बजे से श्री मुरली मनोहर मंदिर में विशेष श्रृंगार के माध्यम से भगवान शिव के चंद्रमौली स्वरूप, प्रभु श्रीरामचंद्र और भगवान श्रीकृष्णचंद्र के दिव्य स्वरूपों की झलक एक साथ देखने को मिली। विठलेश सेवा समिति द्वारा इस पावन अवसर के लिए विशेष श्रृंगार किया गया था। मंदिर में भगवान के दिव्य स्वरूपों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह रहा। शरद पूर्णिमा के धार्मिक महत्व के अनुरूप मंदिर में भक्ति और आस्था का वातावरण दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। कुबेरेश्वरधाम में शरद पूर्णिमा महोत्सव के दौरान एक ओर भगवान के विशेष श्रृंगार और दर्शन का आयोजन हुआ, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी वितरित कर सेवा का संदेश दिया गया। विठलेश सेवा समिति के सदस्यों और सेवादारों ने आयोजन में सहयोग किया। पर्व के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ अच्छे कर्म, कर्तव्यनिष्ठा और सदाचार अपनाने की प्रेरणा मिली।

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