दिल्ली : भारतीय शिक्षा प्रणाली मानवीय विकास के सभी पहलुओं में सामंजस्य बनाए रखती है : जोशी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

दिल्ली : भारतीय शिक्षा प्रणाली मानवीय विकास के सभी पहलुओं में सामंजस्य बनाए रखती है : जोशी

Murli-manohar-joshi
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली एक ऐसी दुनिया बनाने में विश्वास रखती है, जहां मानवीय विकास के सभी पहलुओं - भौतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिकता का सामंजस्य हो। जोशी ने यहां 21वें भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) उच्च शिक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भारतीय शिक्षा प्रणाली एक ऐसी दुनिया बनाने में विश्वास रखती है जहां मानवीय विकास के सभी पहलुओं - भौतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिकता का सामंजस्य हों।’’


यहां भारत मंडपम में बृहस्पतिवार को शुरू हुआ दो दिवसीय सम्मेलन ‘‘नयी विश्व व्यवस्था के लिए उच्च शिक्षा: सुधार, लचीलापन और प्रासंगिकता’’ विषय पर आधारित है। सम्मेलन के दौरान जोशी ने पत्रकारों से कहा कि छात्रों की जायज मांगों को सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए, न कि लाठियों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। छात्रों के उग्र प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर भाजपा नेता ने कहा, ‘‘छात्रों की उचित या जायज मांगों को हमेशा और बहुत सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए। लाठीचार्ज का तरीका सही नहीं है। इस तरह से कभी समाधान नहीं मिल सकता। अगर कोई समस्या है, तो उनकी बात सुनें। वे हमारे बच्चे हैं।’’ जोशी ने सम्मेलन में ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को अपनाने से लेकर तैयारी तक - भारतीय उच्च शिक्षा को एआई-युग के लिए तैयार करना’’ नामक एक रिपोर्ट भी जारी की। सिम्बायोसिस विश्वविद्यालय की कुलाधिपति विद्या येरवडेकर ने कहा कि प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वर्चस्व वाली दुनिया में उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे अपने छात्रों को चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएं और भविष्य के लिए तैयार करें। फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ज्ञान पाने के तरीके को बदल रहा है। एक स्नातक को जिस स्तर की शिक्षा की जरूरत होती है एआई उसे बेहद तेजी से उपलब्ध करा रहा है जो कोई भी पाठ्यक्रम समिति नहीं कर सकती। कम निश्चितता के बावजूद दुनिया भर के विश्वविद्यालयों से उस दुनिया के बारे में अधिक से अधिक काम के लिए कहा जा रहा है जहां उनके छात्र प्रवेश करेंगे।’’ थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कुलपति पद्माकुमार नायर ने कहा कि विश्वविद्यालयों को करुणा और उत्कृष्टता, दोनों को साथ लेकर चलना सीखना होगा।

कोई टिप्पणी नहीं: