प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करें तो 2024 में 12 हजार करोड़ रुपए जुर्माना राशि के 8 करोड़ वाहनों के चालान हुए। हांलाकि 2025 में यह संख्या कम होकर 8920 करोड़ रुपए के 5.16 करोड़ ट्रैफिक चालान तक रही। मोटे रुप से इनमें 55 प्रतिशत चालान चौपहिया वाहनों के हैं तो 45 फीसदी चालान दोपहिया वाहनों के हैं। एक मोटे अनुमान के अनुसार चालान शुदा राशि में से 64 से लेकर 70 प्रतिशत राशि जमा ही नहीं होती है और साल दर साल बकाया चलती रहती है। वैसे भी इतनी अधिक संख्या में चालान बकाया रहने से न्यायिक प्रक्रिया पर भी बोझ पड़ता है तो सरकार को भी हजारों करोड़ की जुर्माना राशि जमा नहीं होने से राजकोष को एक तरह से हानि भुगतनी पड़ती है। वैसे भी भले ही बकाया राशि 8 हजार करोड़ रुपये सालाना हो या 12 हजार करोड़ रुपये की राशि हो, राजकोष में यह राशि होने से विकास कार्य में ही इसका उपयोग हो सकता है। अन्यथा कागजों में तो हजारों करोड़ का जुर्माना बकाया बोलता रहता है पर राजकोष में जमा के नाम पर कुछ नहींं होता।
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों को दिशा बता दी है। वैसे भी एक बात साफ हो जानी चाहिए कि यातायात नियमों की सख्ती से पालना पर ही दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक संभव है। अन्यथा स्थिति में चालान हो जाने पर भी लोगों में भय नहीं रहता है। वैसे भी जिस तरह से वाहन चलाने में लापरवाही, चाहे जहां वाहन को खड़ी कर यातायात को बाधित करने, यातायात नियमों की पालना के प्रति गंभीर ना होने के कारण ही दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। बात थोड़ी कडबी हो सकती है पर खासतौर से युवा और प्रबुद्ध लोग यातायात नियमों की पालना के प्रति गंभीर ना थे और ना ही है। होता भी यह है कि यातायात विभाग द्वारा समय समय पर अभियान तो चलाया जाता है पर ऐसे हालात अभी नहीं बने कि कोई भी यातायात नियमों की अवहेलना करने से पहले दस बार सोचें। सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी के अनुसार जुर्माना राशि की वसूली के प्रति गंभीरता दिखाई जाएं तो बहुत कुछ हालात में सुधार हो सकता है। जब जुर्माना राशि पानी-बिजली के बिल में जुड़ कर आयेगी और राशि जमा नहीं कराने पर कनेक्शन कटने के हालात होंगे तो अपनेआप ही जुर्माना राशि जमा होने लगेगी। इसी तरह से ऐसे वाहनों की जब्ती या बेचान या फिर पुनः रजिस्ट्रेशन के समय पहले जुर्माना राशि वसूली जाती है तो राजकीय कोष में जुर्माना राशि की वसूली तो होगी ही इसके साथ ही इस तरक के प्रयासों को सार्वजनिक रुप से प्रसारित किया जाता है तो इसका सकारात्मक प्रभाव सामने आयेगा। इसके अलावा वसूली के लिए नोटिस जारी करने, कागजी कार्रवाई करने आदि में होने वाले मानव संसाधन श्रम, समय और राजकीय धन के अनावश्यक व्यय जाया भी नही होगा। वैसे भी सरकार को यातायात नियमों की पालना और जुर्माना राशि की वसूली के प्रति गंभीर होने से ही यातायात नियमों की पालना और लापरवाही पर कारगर रोक संभव हो सकेगी।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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