- काशी के कोतवाल की आरती में शामिल हुए दोनों मुख्यमंत्री, बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में षोडशोपचार पूजन; राष्ट्र के सुख-समृद्धि और लोककल्याण की कामना, बच्चों को योगी ने बांटी चॉकलेट
बच्चों के बीच सहज हुए योगी
बाबा काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बच्चों के प्रति स्नेह भी देखने को मिला। मंदिर परिसर में मौजूद बच्चों को उन्होंने आत्मीयता के साथ चॉकलेट बांटी। मुख्यमंत्री का यह सहज व्यवहार वहां मौजूद लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा। काल भैरव के दर्शन के बाद दोनों मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए रवाना हुए। बाबा विश्वनाथ के धाम पहुंचकर दोनों ने विधिवत दर्शन-पूजन किया।
गर्भगृह में जलाभिषेक, षोडशोपचार पूजन
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दोनों मुख्यमंत्रियों ने गर्भगृह में जाकर बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया। इसके बाद जलाभिषेक किया और षोडशोपचार विधि से पूजन-अर्चन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा विश्वनाथ की आराधना करते हुए दोनों ने राष्ट्र के सुख-समृद्धि और लोककल्याण की कामना की। कामाख्या की धरती असम से आए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और बाबा विश्वनाथ की नगरी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक साथ विश्वनाथ मंदिर में पहुंचना काशी की उस आध्यात्मिक परंपरा को भी सामने लाया, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों की आस्था एक ही धारा में आकर मिलती है।
कामाख्या से काशी तक आस्था का सेतु
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इससे पहले सेवा संकल्प यात्रा के समापन समारोह में भी काशी और बाबा विश्वनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि वह कामाख्या की धरती से बाबा विश्वनाथ की धरती को प्रणाम करने आए हैं। इसी भाव की झलक बुधवार को मंदिरों में भी दिखाई दी। असम की कामाख्या और उत्तर प्रदेश की काशी, दो अलग भूगोल लेकिन एक साझा आस्था। बाबा काल भैरव के दरबार से शुरू हुआ यह दर्शन क्रम बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह तक पहुंचा।
काल भैरव से विश्वनाथ तक काशी की परंपरा
काशी की धार्मिक परंपरा में बाबा काल भैरव और बाबा विश्वनाथ के दर्शन का विशेष महत्व है। इसी क्रम में दोनों मुख्यमंत्री पहले काल भैरव मंदिर पहुंचे और फिर विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया। धार्मिक आस्था से जुड़े इस कार्यक्रम में राष्ट्र और समाज के कल्याण की कामना प्रमुख रही। सेवा संकल्प यात्रा के समापन समारोह में युवाओं ने वडनगर से काशी तक हजारों किलोमीटर की यात्रा पूरी की। इसके बाद काशी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का बाबा काल भैरव और बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंचना दिन के कार्यक्रम का आध्यात्मिक पक्ष बना। काशी के कोतवाल के दरबार में शीश नवाने से लेकर बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में जल अर्पित करने तक—दोनों मुख्यमंत्रियों की इस आस्था यात्रा का केंद्र राष्ट्र और लोककल्याण की कामना रही।

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