दिल्ली : CJP के प्रदर्शनों की तुलना फ्रांस, नेपाल व बांग्लादेश की अशांति से किए जाने को दीपके ने खारिज किया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

दिल्ली : CJP के प्रदर्शनों की तुलना फ्रांस, नेपाल व बांग्लादेश की अशांति से किए जाने को दीपके ने खारिज किया

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नई दिल्ली। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को इस बात को खारिज कर दिया कि मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) के खिलाफ उनके संगठन का प्रदर्शन फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश में हुई हिंसक अशांति जैसा है।दीपके ने कहा कि उनके साथी सौरव दास और आशुतोष रांका “खुशी-खुशी जेल गए” और उन्होंने “नफरत के बजाय शांति” को चुना, क्योंकि वे महात्मा गांधी के सत्याग्रह के रास्ते पर चल रहे हैं। समर्थकों के लिए एक भावुक संदेश में, दीपके ने उनसे त्योहारों के दौरान अपने परिवारों के साथ समय बिताने की अपील की। ​​साथ ही, उन्होंने दास और रांका को याद किया, जो 13 अक्टूबर से जेल में हैं और अपने परिजनों के साथ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में शामिल लोगों के परिवार भी उनके विरोध करने के फैसले का खामियाजा भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा, “कुछ दिनों के लिए अपने परिवारों के साथ समय बिताएं। अपने परिजनों और अपनों के साथ रहें। जब आप अपने परिवारों के साथ हों, तो कृपया सौरव और आशु को याद रखें, क्योंकि वे दोनों अपने परिवारों के साथ नहीं रह सकते। इसलिए, वे हमारे परिवार हैं।” विदेशों में हो रही अशांति से तुलना करने वालों का जिक्र करते हुए, दीपके ने कहा कि कॉजपा नेताओं ने जेल जाने के बावजूद हिंसा का सहारा नहीं लिया। 


उन्होंने बताया कि इसके बजाय, उन्होंने मुस्कुराते हुए अपनी कैद को स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, “कुछ शर्म करो और देखो कि भारत में क्या हो रहा है। भारत में, सौरव दास और आशुतोष खुशी-खुशी जेल चले गए। उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया, जैसा कि फ्रांस में हो रहा है।” दीपके ने कहा कि भले ही वे मानते थे कि उन्हें गलत तरीके से कैद किया गया है, फिर भी उन्होंने शांति और करुणा का रास्ता चुना। उन्होंने उनके इस तरीके की तुलना गांधीजी के सत्याग्रह से की और कहा कि वे अहिंसा का पालन करते हुए कैद की पीड़ा सह रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह कोई तुलना नहीं है। लेकिन जब महात्मा गांधी को जेल भेजा गया था, तो वह चुपचाप चले गए थे क्योंकि वे सत्याग्रह कर रहे थे। और आशुतोष और सौरव भी वही सत्याग्रह कर रहे हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि इन गिरफ्तारियों से आंदोलन डरेगा नहीं, और भरोसा जताया कि दास और रांका जेल से वैसी ही मुस्कान के साथ वापस आएंगे और शांतिपूर्ण ढंग से अपना संघर्ष जारी रखेंगे। कॉजपा और उसके समर्थक मतदाता सूचियों के एसआईआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 


दीपके ने कहा, “मैं आपसे कह रहा हूं कि जब सौरव और आशुतोष बाहर आएंगे, तो वे फिर से उसी मुस्कान के साथ जेल से बाहर आएंगे। वे जेल से निकलकर एक बार फिर महात्मा गांधी के दिखाए शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलेंगे।” उन्होंने समर्थकों को इस बात के लिये भी आगाह किया कि इन दोनों नेताओं के साथ हुए बर्ताव की वजह से वे नफरत का रास्ता न अपनाएं। उन्होंने कहा कि करुणा के प्रति इस आंदोलन की प्रतिबद्धता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा, “हम नफरत के खिलाफ लड़ रहे हैं; हम उन लोगों के खिलाफ लड़ रहे हैं जिनके मन में सिर्फ नफरत भरी है। लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि हमारे अंदर नफरत न आ जाए।” उन्होंने जोर देकर कहा, “हमें वह नहीं बनना है जिससे हम नफरत करते हैं।” उन्होंने आंदोलन का विरोध करने वालों पर आरोप लगाया कि वे आंदोलन से जुड़े लोगों को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वे अपना शांतिपूर्ण तरीका छोड़ दें। दीपके ने कहा कि गिरफ्तारियों की वजह से यह आंदोलन पीछे नहीं हटेगा। साथ ही, उन्होंने समर्थकों से अपना और अपने परिवार का ख्याल रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “हम पीछे नहीं हटेंगे। ऐसा नहीं है कि सौरव और आशु के जेल चले जाने से हम डर जाएंगे।”

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