दिल्ली : शांति भंग नहीं करने के हलफनामे के बाद कॉजपा नेता सौरव दास और आशुतोष रांका रिहा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026

दिल्ली : शांति भंग नहीं करने के हलफनामे के बाद कॉजपा नेता सौरव दास और आशुतोष रांका रिहा

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नई दिल्ली। दिल्ली में एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का आदेश दिया। दोनों ने हलफनामा दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और जब तक जंतर-मंतर अधिसूचित धरना स्थल नहीं है, तब तक वहां विरोध-प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। दास और रांका को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया। दोनों ने मुचलके भर दिए, जिसके बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य कर रही सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) रितु राज ने कॉजपा नेताओं को तिहाड़ जेल से रिहा करने का आदेश दिया। इससे पहले, पुलिस ने दास और रांका की न्यायिक हिरासत तीन दिन बढ़ाने का अनुरोध किया था। पुलिस ने दलील दी थी कि दोनों के पिछले आचरण और मीडिया में दिए गए बयानों को देखते हुए शांति भंग होने तथा कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। पुलिस ने यह भी दलील दी कि दास और रांका ने इसी तरह की गतिविधियों से दूर रहने की अपनी इच्छा को लेकर अदालत और मीडिया के सामने विरोधाभासी बयान दिए थे। आदेश के मुताबिक, बुधवार को सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं की ओर से पेश लिखित जवाब भी उनके पहले के बयानों के विपरीत था। 


कॉजपा ने दास और रांका की रिहाई का स्वागत किया। कॉजपा संस्थापक अभिजीत दीपके ने दोनों को खुद से “बहुत, बहुत बड़ा नेता” बताया। संगठन की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा कि यह फैसला पहले ही आ जाना चाहिए था। दीपके ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “सौरव और आशु मुझसे न सिर्फ बेहतर, बल्कि कहीं ज्यादा बड़े नेता हैं। आपके आदेशों का पालन करने में मुझे खुशी है, मेरे नेताओं। जान हाजिर है।” उन्होंने हिंदी में एक मजाकिया टिप्पणी भी की, “लेकिन इसके बाद मेरे बिना गार्डन में कोई अकेला नहीं घूमेगा!!!” दीपके ने एक अन्य पोस्ट में दास और रांका की तस्वीर साझा की और उसके साथ “मेरे नेता” लिखा। वहीं, सिंह ने कहा, “यह फैसला बहुत पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन अब भी देर नहीं हुई है।” उन्होंने कहा कि कॉजपा के सदस्य भावुक हैं और दास तथा रांका से मिलने के लिए उत्सुक हैं। सिंह ने कहा, “टीम भी इस समय बहुत भावुक है। सदस्य उनसे मिलना चाहते हैं, क्योंकि काफी समय से किसी की उनसे मुलाकात नहीं हुई है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में जमानतदारों से जुड़ी समस्याओं या तकनीकी कारणों से किसी की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाया जाएगा। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी दास और रांका की रिहाई का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पूरा देश दास और रांका के साथ खड़ा है। केजरीवाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आशुतोष और सौरव को जमानत मिलने पर बहुत बधाई। ऐसे ही देश के लिए संघर्ष करते रहें। पूरा देश आपके साथ है।” 


भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि दास और रांका को राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश करने के लिए नहीं, बल्कि शांति बनाए रखने के बॉण्ड का उल्लंघन करने के कारण न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। सुनवाई के दौरान पुलिस ने कॉजपा के एक अन्य सदस्य के उस बयान का भी हवाला दिया, जो पिछली सुनवाई के बाद नेताओं को तिहाड़ जेल ले जाते समय मीडिया में दिया गया था। पुलिस ने दलील दी कि इस बयान से विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत की अवमानना हुई। दास और रांका के वकील ने बिना शर्त माफी मांगी और अदालत को आश्वासन दिया कि इस तरह का आचरण दोहराया नहीं जाएगा।  हालांकि, मजिस्ट्रेट ने कहा कि शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल निवारक उपायों की जरूरत दोनों नेताओं से मुचलके भरवाकर और उनके लिखित हलफनामे लेकर पर्याप्त रूप से पूरी की जा सकती है। अदालत ने कहा कि उसके समक्ष दिए गए आश्वासनों को देखते हुए इस चरण में दोनों को आगे न्यायिक हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। दास और रांका ने अपने अलग-अलग हलफनामों में शांति भंग नहीं करने का वादा किया और एसईएम अदालत सहित न्यायपालिका तथा उसकी संस्थाओं में विश्वास जताया। उन्होंने विशेष रूप से आश्वासन दिया कि जब तक कानून के अनुसार जंतर-मंतर अधिसूचित धरना स्थल नहीं है, तब तक वे वहां विरोध-प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। दोनों ने कहा कि उनके द्वारा किया जाने वाला कोई भी विरोध-प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में रहेगा।


मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी को अगली सुनवाई पर जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। दोनों नेताओं और उनके जमानतदारों को भी अगली सुनवाई पर उपस्थित रहने को कहा गया है। अदालत ने दास और रांका को कार्यवाही की प्रत्येक तारीख पर उपस्थित रहने और अपने मुचलकों तथा स्वेच्छा से दिए गए हलफनामों की शर्तों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया। आदेश में कहा गया कि जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को अपराह्न तीन बजे निर्धारित की गई है। जंतर-मंतर के गैर-अधिसूचित विरोध स्थल में कथित तौर पर प्रवेश और शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉण्ड का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिए जाने के बाद दास और रांका को 14 अक्टूबर को शुरुआत में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अदालत ने 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी थी, जो बुधवार को समाप्त होनी है। इससे पहले दिन में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दास और रांका की न्यायिक हिरासत के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने उनसे एसईएम के समक्ष निर्धारित सुनवाई के नतीजे का इंतजार करने और शिकायत बरकरार रहने पर अपीलीय अदालत का रुख करने को कहा था। प्रदर्शनों के दौरान शांति भंग होने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर, संसद मार्ग थाने की पुलिस ने निवारक कार्रवाई के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत दोनों नेताओं के खिलाफ कार्यवाही शुरू की थी।

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