दिल्ली : ब्रिटिश शासन के दौरान भी सिविल सेवा परीक्षा में संस्कृत का एक प्रश्नपत्र होता था : मोदी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 4 अक्टूबर 2026

दिल्ली : ब्रिटिश शासन के दौरान भी सिविल सेवा परीक्षा में संस्कृत का एक प्रश्नपत्र होता था : मोदी

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नई दिल्ली।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की स्वतंत्रता से पहले की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े एक ऐतिहासिक तथ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान भी सिविल सेवा परीक्षा में संस्कृत का एक प्रश्नपत्र होता था। राष्ट्रीय राजधानी के ‘भारत मंडपम’ में बृहस्पतिवार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई अभिलेखीय प्रदर्शनी के एक विवरण का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1920 में अपनी परीक्षा के दौरान संस्कृत विषय की परीक्षा दी थी। मोदी ने कहा, ‘‘गैलरी को देखते हुए मैंने ध्यान दिया कि इसमें यह जानकारी भी दी गई है कि सुभाष चंद्र बोस ने 1920 में इसी प्रक्रिया से गुजरते हुए परीक्षा दी थी।” उन्होंने कहा, ‘‘मेरा ध्यान इस बात ने खींचा कि उस समय भारत ब्रिटिश शासन होने के बावजूद परीक्षा में संस्कृत एक प्रश्नपत्र हुआ करता था, जिसे सुभाष बाबू ने भी दिया था।’’ प्रधानमंत्री ने बोस और अन्य ऐतिहासिक विभूतियों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले एक शताब्दी में कई लोगों ने परीक्षा प्रक्रिया को “विश्वास की विरासत” में बदल दिया और इस संस्था को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मोदी ने युवा अभ्यर्थियों और कार्यक्रम में मौजूद लोगों से भारत की सिविल सेवा व्यवस्था की गहरी ऐतिहासिक यात्रा को समझने के लिए गैलरी देखने का आग्रह किया। यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री ने एक विशेष स्मारक सिक्का, डाक टिकट और भारत में लोक सेवा आयोगों को आकार देने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों को दर्ज करने वाली एक पुस्तक भी जारी की।

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