वाराणसी : गंगा के ऊपर गरजा भारत का शौर्य, राफेल-सुखोई की गर्जना से गूंजा काशी का आसमान - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

वाराणसी : गंगा के ऊपर गरजा भारत का शौर्य, राफेल-सुखोई की गर्जना से गूंजा काशी का आसमान

  • विंग्स ओवर गंगा की ग्रैंड रिहर्सल में दिखा वायुसेना का अद्भुत कौशल, हवा से क्रूज पर उतरे कमांडो तो थम गईं निगाहें
  • नमो घाट से अस्सी तक आसमान में रोमांच की उड़ान, 22, 24 और 25 अक्टूबर को होगा मुख्य प्रदर्शन; 25 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने का कार्यक्रम

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वाराणसी (सुरेश गांधी). गंगा की लहरें शांत थीं, घाटों पर आस्था का प्रवाह अपने स्वाभाविक वेग से आगे बढ़ रहा था। तभी आसमान में एक ऐसी गर्जना गूंजी कि काशी की निगाहें अनायास ऊपर उठ गईं। देखते ही देखते लड़ाकू विमानों की गर्जना ने गंगा के प्रवाह के साथ कदमताल शुरू कर दी। राफेल की रफ्तार, सुखोई की गर्जना और स्वदेशी तेजस की उड़ान ने ऐसा दृश्य रचा कि मानो आकाश में भारत के सामर्थ्य की नई इबारत लिखी जा रही हो। बुधवार को भारतीय वायुसेना की ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो की ग्रैंड रिहर्सल में काशी ने देश की हवाई ताकत और वायु योद्धाओं के असाधारण कौशल की झलक देखी। आसमान में लड़ाकू विमानों की तेज उड़ानें, हेलीकॉप्टरों के हैरतअंगेज करतब और गंगा में चल रहे क्रूज पर रस्सियों के सहारे उतरते जवानों का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। नमो घाट से अस्सी घाट तक गंगा के किनारे इस नजारे को देखने वालों के लिए यह महज हवाई अभ्यास नहीं, बल्कि देश के सैन्य सामर्थ्य को करीब से महसूस करने का रोमांचक अवसर था। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम की रिहर्सल ने तीन दिवसीय आयोजन को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है। मुख्य एयर शो 22, 24 और 25 अक्टूबर को प्रस्तावित है। अंतिम दिन 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। करीब 100 विमानों और हेलीकॉप्टरों के प्रदर्शन की योजना के साथ गंगा के ऊपर होने वाला यह आयोजन काशी के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है।


हवा में रफ्तार, गंगा के ऊपर शौर्य

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ग्रैंड रिहर्सल के दौरान आसमान में एक के बाद एक लड़ाकू विमानों की मौजूदगी ने वातावरण को रोमांच से भर दिया। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन ने भारतीय वायुसेना की विविध क्षमताओं की झलक दिखाई। इन विमानों की उड़ान केवल गति का प्रदर्शन नहीं थी। हर मोड़, हर कलाबाजी और हर सटीक मूवमेंट के पीछे महीनों का प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और पायलटों का असाधारण अनुशासन छिपा है। हजारों फीट ऊपर हवा के बीच संतुलन साधते वायु योद्धाओं ने यह दिखाया कि आधुनिक युद्धक विमानन में गति के साथ सटीकता और समन्वय कितना महत्वपूर्ण है। गंगा के ऊपर से गुजरते विमानों की गर्जना और नीचे बहती नदी का दृश्य एक अनूठा विरोधाभास रच रहा था। एक ओर सदियों से सभ्यता, संस्कृति और अध्यात्म की वाहक मां गंगा, दूसरी ओर आधुनिक भारत की तकनीकी क्षमता और सैन्य तैयारी का प्रतीक बनते लड़ाकू विमान। काशी के इस दृश्य में परंपरा और आधुनिकता एक साथ नजर आईं।


क्रूज पर उतरे जवान, सांसें थाम देने वाला प्रदर्शन

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एयर शो की रिहर्सल में सबसे रोमांचक दृश्यों में एक हेलीकॉप्टर से जवानों का गंगा में चल रहे क्रूज पर उतरना रहा। हवा में मंडराते हेलीकॉप्टर से रस्सियों के सहारे नीचे आते जवानों ने जलक्षेत्र में त्वरित कार्रवाई की क्षमता का प्रदर्शन किया। गंगा की लहरों के बीच चल रहे क्रूज पर उतरने की यह प्रक्रिया साधारण करतब नहीं है। इसमें हेलीकॉप्टर का संतुलन, पायलट और जवानों के बीच सटीक तालमेल तथा निर्धारित स्थान पर सुरक्षित उतरने का कौशल अहम होता है। जरा-सी चूक भी चुनौती बन सकती है। ऐसे में जवानों की नियंत्रित गति और अनुशासित कार्रवाई ने दर्शकों को रोमांचित किया। इस प्रदर्शन ने यह भी रेखांकित किया कि वायुसेना की भूमिका केवल आसमान में दुश्मन के विमानों का मुकाबला करने तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर कठिन परिस्थितियों में जवानों को पहुंचाना, बचाव अभियान चलाना और विभिन्न परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई करना भी सैन्य क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गंगा के बीच क्रूज पर उतरते जवानों का दृश्य काशी के इस आयोजन को सामान्य फ्लाईपास्ट से अलग पहचान देता है। नदी, घाट और आधुनिक सैन्य तकनीक के बीच बना यह दृश्य लोगों की स्मृतियों में लंबे समय तक रहने वाला है।


नमो घाट से अस्सी तक आसमान बना रोमांच का मंच

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रिहर्सल के दौरान गंगा किनारे के विभिन्न घाटों और आसपास के क्षेत्रों से विमानों की गतिविधियां देखी गईं। नमो घाट से अस्सी घाट की दिशा तक आसमान में होने वाली गतिविधियों ने लोगों का ध्यान खींचा। विमानों की गर्जना सुनकर लोग घरों की छतों, घाटों और खुले स्थानों से आसमान की ओर देखने लगे। काशी में गंगा के घाट केवल धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक आयोजनों के स्थल नहीं हैं। वे शहर की सामूहिक स्मृतियों और सार्वजनिक जीवन का भी हिस्सा हैं। ऐसे में इन्हीं घाटों के ऊपर आधुनिक लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन शहर को एक नया अनुभव दे रहा है। इस आयोजन की खासियत यह है कि यहां दर्शकों को सैन्य विमानन की तकनीक और कौशल देखने के लिए किसी एयरबेस तक जाने की जरूरत नहीं। गंगा और उसके घाटों की पृष्ठभूमि में होने वाला प्रदर्शन देश की सैन्य क्षमता को जनसामान्य के करीब लाने का अवसर भी बनेगा।


छह लड़ाकू विमान एक साथ दिखाएंगे दम

मुख्य एयर शो में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे छह प्रमुख लड़ाकू विमानों की मौजूदगी खास आकर्षण होगी। इन विमानों की क्षमताएं और परिचालन भूमिकाएं अलग-अलग हैं। इनके एक साथ प्रदर्शन से भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े की विविधता और सामरिक कौशल की झलक मिलेगी। स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस की मौजूदगी भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों को भी रेखांकित करेगी। वहीं राफेल और सुखोई जैसे विमानों की उड़ान आधुनिक युद्धक विमानन की क्षमता का प्रदर्शन करेगी। इनके अलावा परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर और एरोबेटिक टीमें भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगी। सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम के सधे हुए हवाई करतब और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम की प्रस्तुतियां दर्शकों के आकर्षण को और बढ़ाएंगी।


100 विमानों के प्रदर्शन की तैयारी

‘विंग्स ओवर गंगा’ के तहत करीब 100 विमानों और हेलीकॉप्टरों के प्रदर्शन की योजना है। उपलब्ध कार्यक्रम संबंधी जानकारियों के अनुसार, इसमें लगभग 52 लड़ाकू विमान, 15 परिवहन विमान और 32 हेलीकॉप्टर शामिल हो सकते हैं। इनके साथ अलग-अलग प्रदर्शन दल भी अपनी क्षमताओं का परिचय देंगे। यह आयोजन भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर उसकी परिचालन क्षमता, तकनीकी दक्षता और हवाई समन्वय को सामने लाने का महत्वपूर्ण अवसर है। इतने बड़े स्तर पर विभिन्न श्रेणियों के विमानों की भागीदारी के लिए उड़ान संचालन, सुरक्षा, समय प्रबंधन और तकनीकी समन्वय का उच्च स्तर जरूरी होता है। तीन निर्धारित तिथियों पर होने वाले इस आयोजन की रिहर्सल ने तैयारियों की गंभीरता और व्यापकता का संकेत दिया है। 21 अक्टूबर को हुई ग्रैंड रिहर्सल के बाद अब निगाहें मुख्य प्रदर्शन पर हैं।


25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री के आने का कार्यक्रम

एयर शो के अंतिम दिन 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। काशी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र भी है। ऐसे में उनके सामने गंगा के ऊपर भारतीय वायुसेना की क्षमता का प्रदर्शन शहर के लिए विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री की संभावित मौजूदगी के मद्देनजर आयोजन की सुरक्षा, यातायात और दर्शकों की आवाजाही से जुड़ी व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी। लोगों को कार्यक्रम के दौरान प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करना होगा। दर्शकों के लिए प्रवेश, देखने के निर्धारित स्थानों और समय से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देना जरूरी है।


काशी के लिए गौरव का क्षण

वाराणसी में इस स्तर का हवाई प्रदर्शन शहर के लिए एक विशिष्ट अवसर है। अब तक काशी की पहचान मुख्य रूप से धर्म, अध्यात्म, संगीत, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के केंद्र के रूप में रही है। गंगा के ऊपर होने वाला यह आयोजन उसी पहचान के साथ आधुनिक भारत की सैन्य और तकनीकी क्षमता का नया आयाम जोड़ रहा है। यहां गंगा केवल नदी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना की प्रतीक हैं। उन्हीं की लहरों के ऊपर जब राफेल, सुखोई और तेजस जैसे विमान अपनी क्षमता का परिचय देते हैं, तो दृश्य में एक अलग ही अर्थ जुड़ जाता है। घाटों की प्राचीनता और विमानों की आधुनिकता मिलकर काशी के बदलते स्वरूप को सामने लाती हैं। 21 अक्टूबर की ग्रैंड रिहर्सल ने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में काशी का आसमान और भी जीवंत होने वाला है। 22, 24 और 25 अक्टूबर को होने वाले मुख्य प्रदर्शन में वायुसेना के वायु योद्धा अपनी दक्षता, अनुशासन और तकनीकी सामर्थ्य का परिचय देंगे। गंगा के ऊपर गूंजती विमानों की गर्जना के बीच काशी का संदेश साफ है—यह शहर अपनी विरासत पर गर्व करता है और आधुनिक भारत की उपलब्धियों का साक्षी बनने के लिए भी तैयार है।

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