उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन, जाहिर है कि देश के वास्तविक शासक पाकिस्तानी सेना यानी ‘फौज’ का हित सर्वोपरि है और हम पाकिस्तानी प्रतिनिधि की मुश्किल को पूरी तरह समझते हैं।’’ संयुक्त राष्ट्र में भारत की आलोचना करने की पाकिस्तान की कोशिश के बीच अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के उसके रिकॉर्ड पर सवाल उठाते हुए पुरी ने कहा कि यह अच्छी तरह दर्ज है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी देश की आजादी के बाद से उल्लेखनीय रूप से घटी है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अक्सर जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाता है और इस क्षेत्र को लेकर भारत के रुख को चुनौती देता है। इस्लामाबाद के दावों को खारिज करते हुए पुरी ने दोहराया कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अब केवल पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली कराया जाना बाकी है। उन्होंने कहा, ‘‘हम पाकिस्तानी प्रतिनिधि से आग्रह करेंगे कि वह अपने ही देशवासियों की सलाह पर ध्यान दें, अपने देश की स्थिति पर नजर डालें और सबसे पहले अपने नागरिकों की भलाई पर ध्यान केंद्रित करें।’’ इसके बाद पुरी ने ‘फॉर्म 47 सरकार’ शब्द का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान के 2024 के आम चुनावों में नतीजों में हेरफेर के आरोपों के संदर्भ में वहां की सत्तारूढ़ व्यवस्था के आलोचक इस शब्द का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम यह भी समझते हैं कि दुर्भाग्य से ‘फॉर्म 47’ सरकार पाकिस्तानी सेना के निर्देशों को दरकिनार करने की हिम्मत नहीं कर सकती।’’ उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के हित सर्वोपरि हैं और सेना ही देश की ‘‘वास्तविक शासक’’ है।
यह टिप्पणी पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर वहां की सेना के लंबे समय से चले आ रहे प्रभाव को लेकर जताई जाने वाली चिंताओं के बीच आई है। अल्पसंख्यक मुद्दों पर विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए पुरी ने कहा कि भारत इस मूल विचार से सहमत है कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें बढ़ावा देना मुख्य रूप से संबंधित देशों की संप्रभु जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘‘संप्रभु समानता के सिद्धांत के तहत किसी देश के आंतरिक मुद्दों को वहां लागू नियमों और विनियमों के अनुसार ही सुलझाया जाना चाहिए। इन जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए हम बहुपक्षीय मंचों पर खुली और स्पष्ट बातचीत करने को तैयार हैं।’’ पुरी ने जोर देकर कहा कि भारत दुनिया का सबसे अधिक बहुधार्मिक, बहुजातीय और बहुभाषी समाज है तथा विविधता उसकी सभ्यता के मूल सिद्धांतों में से एक रही है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस पर गर्व है।’’ उन्होंने धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने वाले संवैधानिक प्रावधानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों, सरकारी संस्थानों, सशस्त्र बलों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, फिल्म उद्योग और कॉरपोरेट क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा भारत के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में अहम योगदान दिया है। इस संबंध में पाकिस्तान के रिकॉर्ड की आलोचना करते हुए पुरी ने कहा कि पड़ोसी देश में इस तरह के उदाहरण तलाशना उनके लिए ‘‘काफी मुश्किल’’ होगा।

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