अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा शुक्रवार को हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश के अनुसार, यह छूट तब तक लागू रहेगी, जब तक ट्रंप या विदेश मंत्री, जरूरत के अनुसार वित्त मंत्री और व्यापार प्रतिनिधि से परामर्श करके यह तय नहीं कर लेते कि आगे कोई कार्रवाई करना उचित होगा। ट्रंप ने मियामी के पास मार-ए-लागो रिसॉर्ट में पत्रकारों से कहा कि ग्राहम अधिनियम के तहत प्रतिबंधों से छूट देने का उनका फैसला अमेरिका के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा, ‘‘आपमें से कई लोगों को अभी नहीं पता कि मेरा फैसला क्या है, लेकिन हम इसे समझ लेंगे और आपको भी पता चल जाएगा।’’ ट्रंप ने कहा, ‘‘यह बहुत अच्छा फैसला है और यह देश के लिए फायदेमंद होगा। मुझे लगता है कि यह दुनिया के लिए भी अच्छा होगा क्योंकि हम वैश्विक स्तर पर वास्तव में अहम भूमिका निभा रहे हैं।’’ रुबियो ने कहा कि जब ग्राहम अधिनियम पारित किया गया था, तब छूट का प्रावधान इसलिए रखा गया था ताकि दुनिया भर में हो रही विभिन्न घटनाओं के प्रभाव का अध्ययन किया जा सके। इन घटनाओं में ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव, सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के हमले और रूस-यूक्रेन युद्ध शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मुझे लगता है कि इन सभी बातों को ध्यान में रखकर इनके प्रभाव का तुलनात्मक आकलन करना जरूरी है।’’
रुबियो सोमवार को भारत पहुंचेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘भारत जैसे देश ऊर्जा के स्रोतों में विविधता लेकर आए हैं, लेकिन वे अब भी रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त कर रहे हैं क्योंकि ऊर्जा के स्रोत एक दिन में बदलना आसान नहीं है।’’ रुबियो ने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने और यह तय करने के लिए समय चाहिए कि कौन-सा कदम या किन उपायों का मेल सबसे उचित होगा। रूस पर प्रतिबंधों से छूट देने के ट्रंप के फैसले की रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने आलोचना की है। दोनों दलों ने पिछले महीने मिलकर लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम को भारी बहुमत से पारित किया था। दक्षिण कैरोलाइना से रिपब्लिकन पार्टी की सीनेटर डार्लिन ग्राहम ने भी रूस को प्रतिबंधों से छूट देने के ट्रंप के फैसले की आलोचना की। इस कानून को उनके दिवंगत भाई लिंडसे ग्राहम ने आगे बढ़ाया था और उन्हीं के नाम पर इसका नाम रखा गया था।

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