उन्होंने दावा किया कि एसआईआर में इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर के बारे में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगे जाने पर निर्वाचन आयोग ने ‘ट्रेड सीक्रेट्स’ का हवाला देते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि राज्य में 16.18 लाख ‘फॉर्म-6’ आवेदनों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि पीलीभीत में 10,470 मतदाता रिकॉर्ड में अनियमितताएं सामने आई हैं। खरगे ने कहा कि इन घटनाक्रमों के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की जांच के आदेश देने पड़े हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा और निर्वाचन आयोग की कथित ‘‘मिलीभगत’’ के खिलाफ विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की तीन प्रमुख मांगें हैं। इनमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और उन्हें कथित तौर पर संरक्षण देने वाले 2023 के कानून को निरस्त करना शामिल है। खरगे ने एसआईआर को तत्काल रोकने तथा कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नाम बहाल करने की भी मांग की। उन्होंने सभी चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय मतपत्रों से कराने की मांग करते हुए कहा, ‘‘यह केवल वोट बचाने की लड़ाई नहीं, संविधान और लोकतंत्र बचाने का जनसंघर्ष है।’’
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को आरोप लगाया कि ‘‘वोट चोरी के अनगिनत खुलासों’’ के बावजूद केंद्र सरकार मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। उन्होंने लोगों से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित 'इंडिया' गठबंधन की रैली में शामिल होने की अपील की। खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा तथा ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

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