मस्जिद में आने-जाने की अनुमति देने के याचिकाकर्ता के अनुरोध के जवाब में, दीक्षित ने कहा कि आसपास तोड़फोड़ कार्यों के कारण, इस समय वहां जाना-आना सुरक्षित नहीं होगा। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, ‘‘उन्हें ही तय करने दें। यह एक उचित सुझाव है। हम उन्हें नमाज़ के लिए रास्ता देने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।’ दीक्षित ने कहा कि फिलहाल, श्रद्धालुओं को इस जगह पर मौजूद मंदिर में जाने की भी अनुमति नहीं है। सैयद अहमद सऊद ने अदालत से अनुरोध किया है कि जयपुर पोलो ग्राउंड के परिसर में स्थित रेस कोर्स मस्जिद को तोड़े जाने से बचाया जाए, और साथ ही मस्जिद में प्रवेश की सुविधा फिर से बहाल की जाए। यह मस्जिद 1977 से एक अधिसूचित वक्फ संपत्ति है। केंद्र ने जून में जयपुर पोलो ग्राउंड और अगस्त में उससे सटे दिल्ली रेस क्लब को अपने कब्जे में ले लिया। इससे पहले, केंद्र के वकील ने बताया था कि परिसर में मौजूद अन्य ढांचों को गिराने के दौरान आम जनता को कोई खतरा न हो, इसलिए अधिकारियों ने मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी है।
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने रेस कोर्स मस्जिद में नमाज के लिए जाने की अनुमति देने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया। हालांकि, केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया कि फिलहाल इस धार्मिक स्थल के खिलाफ कोई प्रतिकूल कदम नहीं उठाया जाएगा। लुटियंस दिल्ली इलाके में स्थित मस्जिद को बचाने के लिए दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने मस्जिद के आस-पास तोड़फोड़ के काम का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘अगर कोई घायल हो जाता है, तो मुआवजा कौन देगा?’’ इस जगह को केंद्र सरकार ने ‘‘सार्वजनिक उद्देश्य’’ के लिए अपने कब्जे में ले लिया है। केंद्र सरकार के स्थायी वकील आशीष दीक्षित ने बताया कि अधिकारी इस मुद्दे पर दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से दिए गए प्रतिवेदन पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेंगे और इस बीच कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें