शर्मा ने 1958 से 2000 तक दिल्ली के मॉडर्न स्कूल में फोटोग्राफी शिक्षक के रूप में काम किया। उन्होंने अपनी कलाकार-फोटोग्राफर पत्नी चित्रांगदा शर्मा के साथ मिलकर 1980 में त्रिवेणी कला संगम में फोटोग्राफी विभाग की स्थापना की। आर्ट हेरिटेज गैलरी द्वारा इंस्टाग्राम पर जारी पोस्ट के मुताबिक, शर्मा ने 1989 में फोटोग्राफी के लिए एक दिन समर्पित करने की पहल की थी। इसमें कहा गया, ‘‘उन्होंने अपने उद्देश्य के लिए समर्थन जुटाने के वास्ते दुनिया भर की लगभग 200 फोटोग्राफिक सोसाइटी, कलाकारों और संस्थानों को पत्र लिखे। 1991 में, उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप ‘विश्व फोटोग्राफी दिवस’ को व्यापक मान्यता मिली।’’ विश्व फोटोग्राफी दिवस 19 अगस्त, 1991 से हर साल मनाया जाता रहा है। शर्मा ने 1983 में ‘इंडिया इंटरनेशनल फोटोग्राफिक काउंसिल’ की स्थापना की। इसके अलावा, उन्होंने ‘अमेच्योर फोटोग्राफिक सोसाइटी ऑफ आगरा’ (1959) और ‘फोटो आर्टे ग्रुप’ (1960 के दशक) जैसी फोटोग्राफिक सोसाइटी और समुदायों के गठन में भी अहम भूमिका निभाई।
नई दिल्ली । श्याम-श्वेत तस्वीरों के दिग्गज और ‘विश्व फोटोग्राफी दिवस’ की परिकल्पना करने वाले ओपी शर्मा का शनिवार को दिल्ली के लोधी अंत्येष्टि स्थल पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। शर्मा के बेटे असीम शर्मा ने सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट में जानकारी दी थी कि उनके पिता का शुक्रवार को दिल्ली स्थित आवास पर निधन हो गया था। वह 89 वर्ष के थे। शर्मा का जन्म 1937 में उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ था और उन्होंने कैमरे के इस्तेमाल के बारे में काफी हद तक खुद ही सीखा था। लखनऊ विश्वविद्यालय में भौतिकी के छात्र रहने के दौरान वह फोटोग्राफी के प्रति आकर्षित हुए।

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