उन्होंने आरोप लगाया, “भाजपा के राजनीतिक अहंकार, संवेदनहीन उदासीनता और घोर अक्षमता ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य (मणिपुर) को लंबे संकट में धकेल दिया है। कानून-व्यवस्था बिगड़ने के लिए जिम्मेदार भाजपा नेतृत्व स्थिति के बेकाबू हो जाने पर जवाबदेही से बचने के लिए गायब होने की कोशिश कर रहा है।” खरगे ने कहा कि मणिपुर के लोग शांति, स्थिरता, सम्मान और न्याय के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी मणिपुर के लोगों के साथ खड़ी है, ताकि भाजपा के कुशासन को खत्म किया जा सके और राज्य में शांति, आपसी सद्भाव और प्रगति को बहाल किया जा सके। वेणुगोपाल ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ओर से राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को आयोजित रैली का जिक्र करते हुए कहा कि रामलीला मैदान में जो “गुस्सा” दिखा, वह मणिपुर और उत्तराखंड जैसे भाजपा शासित राज्यों में सत्ता-विरोधी लहर की महज एक झलक था। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “नफरत, लूट, जमीन पर कब्जा और पूरी तरह से कुशासन इन राज्यों (मणिपुर और उत्तराखंड) में भाजपा के ‘ट्रबल इंजन’ मॉडल की पहचान बन गए हैं।”
वेणुगोपाल ने कहा कि मणिपुर “सत्ताधारी पार्टी की ओर से भड़काए गए जातीय संघर्ष की आग में लगातार जल रहा है; वहां के लोगों ने 2024 में लोकसभा की दोनों सीट पर भाजपा को नकार दिया और वे पार्टी को पूरी तरह से सत्ता से बाहर निकालने के लिए अब और इंतजार नहीं कर सकते।” उन्होंने कहा, “देवभूमि उत्तराखंड के मंदिर भी उस ‘चंदा चोरी’ से अछूते नहीं रहे, जिसमें भाजपा ने अयोध्या और पूरे भारत में महारत हासिल कर ली है। भाजपा का लालच सिर्फ पवित्र मंदिरों तक सीमित नहीं है; बल्कि विशाल पहाड़ों को भी कॉरपोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है, जबकि प्रकृति ऐसे अंधाधुंध विनाश के खिलाफ स्पष्ट चेतावनी दे चुकी है।” मणिपुर में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। रविवार रात कांगपोकपी जिले के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए, जहां प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाए और लकड़ी के लट्ठों तथा पत्थरों से रास्ते बंद कर दिए। हालांकि, बाद में पुलिस ने कुछ सड़कों को खाली करवा लिया। अधिकारियों ने बताया कि रविवार सुबह सेनापति जिले के पहाड़ी इलाके में उन दो युवकों के क्षत-विक्षत शव मिले, जो हाल ही में लापता हो गए थे। इस साल फरवरी में कुकी और नगा समुदायों के बीच जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से तामेंगलोंग, नोनी, कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी जिलों में 50 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और दर्जनों घर जला दिए गए हैं।

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