स्वास्थ्य : मिठाइयां सीमित मात्रा में खाएं, बाहर निकलने से बचें: विशेषज्ञों ने दिवाली पर किया सावधान - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

रविवार, 8 नवंबर 2026

स्वास्थ्य : मिठाइयां सीमित मात्रा में खाएं, बाहर निकलने से बचें: विशेषज्ञों ने दिवाली पर किया सावधान

less-sweets-in-deepawali
नई दिल्ली। चिकित्सकों ने लोगों को मिठाइयों का सेवन सीमित मात्रा में करने और बढ़ते वायु प्रदूषण से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने आगाह किया कि प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान हो सकता है, खासकर बच्चों और पहले से बीमारियों से जूझ रहे लोगों को। हृदय एवं वक्ष शल्य चिकित्सक तथा अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के पति डॉ. श्रीराम नेने ने कहा त्योहारों के दौरान कभी-कभार मनपसंद चीजें खाने को लेकर लोगों को अपराधबोध महसूस करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें इसके दुष्परिणामों के प्रति सचेत रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग कभी-कभार मिठाइयों का आनंद ले सकते हैं, लेकिन उन्हें अधिक मात्रा में खाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग कभी-कभार मिठाइयों का आनंद ले सकते हैं, लेकिन इनका अत्यधिक सेवन करने से बचना चाहिए। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने पहले से अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों को सुबह और देर शाम बाहर की गतिविधियों से बचने की सलाह दी। सर्दियों में इन अवधि के दौरान जमीन के करीब वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। मुंबई के नाक-कान और गला के सर्जन डॉ. वरुण दवे ने कहा कि लगभग 250 वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) वाली हवा में सांस लेना प्रतिदिन 10 से 15 सिगरेट पीने के बराबर है। उन्होंने कहा कि अधिक एक्यूआई वाली हवा में धुएं, धूल और कार्बन कणों की मात्रा अधिक होती है। ये प्रदूषक नाक और साइनस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं और श्वासनली से होते हुए फेफड़ों तक पहुंचते हैं, जिससे श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल के फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक टंडन ने लोगों को घरों के अंदर रहने, दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने तथा अच्छी गुणवत्ता वाले ‘एयर प्यूरीफायर’ का इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने विशेष रूप से शयनकक्षों में इनका इस्तेमाल करने पर जोर दिया। उन्होंने बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला एन95 मास्क पहनने की सलाह दी। इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रुचिता शर्मा ने कहा कि वायु प्रदूषण में बेहद सूक्ष्म कण होते हैं, जो नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन शरीर के ऊतकों में गहराई तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये कण शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन बढ़ा सकते हैं, अस्थमा की समस्या को गंभीर बना सकते हैं और दिल के दौरे सहित हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि मलिक ने आगाह किया कि बच्चे वायु प्रदूषण के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं, क्योंकि उनका श्वसन तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है और उनकी सांस की नलियां बेहद संवेदनशील होती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से आंखों में जलन, त्वचा संबंधी एलर्जी और सांस की बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा, इससे अस्थमा का दौरा, ब्रोंकाइटिस और एलर्जिक राइनाइटिस की समस्या भी बढ़ सकती है। डॉ. मलिक ने माता-पिता को सलाह दी कि प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर बच्चों को घर के अंदर रखें और उन्हें पटाखों के धुएं के संपर्क में आने से बचाएं।

कोई टिप्पणी नहीं: