नवीन ने कहा, ‘‘जैसे-जैसे भारत 21वीं सदी में आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे भारतीय जनता पार्टी भी अपने विस्तार और विकास के साथ आगे बढ़ रही है। भाजपा देश की विरासत और पार्टी की परंपरा, दोनों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे समय में राजनीति में जिस गरिमा को बनाए रखना चाहिए, जिस ईमानदारी और शुचिता का पालन करना चाहिए तथा जिस संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए, इन मूल्यों को यदि आज की पीढ़ी को किसी व्यक्तित्व से सीखना है, तो उसका सबसे अच्छा उदाहरण आडवाणी जी हैं। उनका व्यक्तित्व ईमानदारी और शुचिता का प्रतीक है।’’ नवीन ने कहा कि उन्हें भले ही आडवाणी के साथ काम करने का अवसर नहीं मिला, लेकिन उनके साथ काम कर चुके लोगों से मिली जानकारी ने उन्हें यह समझने में मदद की कि उनका जीवन कितना प्रेरणादायक रहा है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘वह कठिन से कठिन फैसले भी बेहद सहजता से ले सकते थे।’’ नवीन ने कहा कि विभाजन का दर्द झेलने के बावजूद आडवाणी ने राष्ट्र के प्रति अपार समर्पण दिखाया। उन्होंने भाजपा की विकास यात्रा की नींव रखने का श्रेय आडवाणी और वाजपेयी को देते हुए कहा कि इन दोनों नेताओं ने महज दो लोकसभा सदस्यों वाली पार्टी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
नवीन ने कहा कि इन दोनों नेताओं के दृढ़ संकल्प ने पार्टी की स्थापना के बाद शुरुआती दौर में व्याप्त अनिश्चितता के माहौल से संगठन को उबरने में मदद की। नवीन ने कहा कि वह आडवाणी को आश्वस्त करना चाहते हैं कि भाजपा के कार्यकर्ता उनकी दूरदृष्टि के अनुरूप पार्टी को आगे ले जाने के लिए काम करेंगे। राम जन्मभूमि आंदोलन और आडवाणी की रथयात्रा का जिक्र करते हुए नवीन ने ‘‘मंदिर वहीं बनाएंगे’’ नारे को याद किया। उन्होंने कहा कि यह नारा भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ देश के करोड़ों लोगों ने लगाया था। इससे पहले, केंद्रीय मंत्री और भाजपा के कोषाध्यक्ष पीयूष गोयल ने आडवाणी के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कभी किसी को यह महसूस नहीं होने दिया कि वह कितने वरिष्ठ या प्रभावशाली हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता उन्हें प्यार से ‘दादा’ कहकर बुलाते थे। गोयल ने कहा कि आडवाणी हमेशा उनके साथ परिवार के सदस्य जैसा व्यवहार करते थे और उन्हें ‘हैप्पी’ उपनाम से जानते थे। उन्होंने यह भी कहा कि आडवाणी जैसे नेताओं की कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता के कारण भाजपा की लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि हुई, जबकि कांग्रेस की सीटों में गिरावट आई।

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