दिल्ली : राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार के साथ खड़े होना आडवाणी से सीखे विपक्ष: नितिन नवीन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 8 नवंबर 2026

दिल्ली : राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार के साथ खड़े होना आडवाणी से सीखे विपक्ष: नितिन नवीन

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को कहा कि विपक्षी दलों को पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से सीखना चाहिए कि देश के सामने कोई चुनौती आने पर सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। आडवाणी के 100वें जन्मदिन के अवसर पर पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में नवीन ने कहा, ‘‘जब भी वह (आडवाणी) संसद में बोलते थे, तो हमेशा कहते थे कि देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष में होने के बावजूद भाजपा सरकार के साथ खड़ी रहेगी। नेता प्रतिपक्ष के रूप में भी उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि जब बात देश की हो, तो पूरा विपक्ष सरकार के साथ खड़ा रहेगा। आज भी लोगों को यह बात सीखने की जरूरत है।’’ नवीन ने कहा कि आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के स्वभाव और व्यक्तित्व में काफी अंतर था, लेकिन एक साझा लक्ष्य के लिए एक दिशा में और एक आवाज के साथ मिलकर काम करने की उनकी क्षमता अद्वितीय थी। उन्होंने कहा कि भाजपा के हर कार्यकर्ता को उनसे यह सीखना चाहिए। उन्होंने आडवाणी को संगठन के प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि राष्ट्र प्रथम की विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने भाजपा की प्रगति और विस्तार को लेकर पार्टी के आलोचकों की धारणाओं को गलत साबित किया है। 


नवीन ने कहा, ‘‘जैसे-जैसे भारत 21वीं सदी में आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे भारतीय जनता पार्टी भी अपने विस्तार और विकास के साथ आगे बढ़ रही है। भाजपा देश की विरासत और पार्टी की परंपरा, दोनों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे समय में राजनीति में जिस गरिमा को बनाए रखना चाहिए, जिस ईमानदारी और शुचिता का पालन करना चाहिए तथा जिस संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए, इन मूल्यों को यदि आज की पीढ़ी को किसी व्यक्तित्व से सीखना है, तो उसका सबसे अच्छा उदाहरण आडवाणी जी हैं। उनका व्यक्तित्व ईमानदारी और शुचिता का प्रतीक है।’’ नवीन ने कहा कि उन्हें भले ही आडवाणी के साथ काम करने का अवसर नहीं मिला, लेकिन उनके साथ काम कर चुके लोगों से मिली जानकारी ने उन्हें यह समझने में मदद की कि उनका जीवन कितना प्रेरणादायक रहा है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘वह कठिन से कठिन फैसले भी बेहद सहजता से ले सकते थे।’’ नवीन ने कहा कि विभाजन का दर्द झेलने के बावजूद आडवाणी ने राष्ट्र के प्रति अपार समर्पण दिखाया। उन्होंने भाजपा की विकास यात्रा की नींव रखने का श्रेय आडवाणी और वाजपेयी को देते हुए कहा कि इन दोनों नेताओं ने महज दो लोकसभा सदस्यों वाली पार्टी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। 


नवीन ने कहा कि इन दोनों नेताओं के दृढ़ संकल्प ने पार्टी की स्थापना के बाद शुरुआती दौर में व्याप्त अनिश्चितता के माहौल से संगठन को उबरने में मदद की। नवीन ने कहा कि वह आडवाणी को आश्वस्त करना चाहते हैं कि भाजपा के कार्यकर्ता उनकी दूरदृष्टि के अनुरूप पार्टी को आगे ले जाने के लिए काम करेंगे। राम जन्मभूमि आंदोलन और आडवाणी की रथयात्रा का जिक्र करते हुए नवीन ने ‘‘मंदिर वहीं बनाएंगे’’ नारे को याद किया। उन्होंने कहा कि यह नारा भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ देश के करोड़ों लोगों ने लगाया था। इससे पहले, केंद्रीय मंत्री और भाजपा के कोषाध्यक्ष पीयूष गोयल ने आडवाणी के साथ अपने जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कभी किसी को यह महसूस नहीं होने दिया कि वह कितने वरिष्ठ या प्रभावशाली हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता उन्हें प्यार से ‘दादा’ कहकर बुलाते थे। गोयल ने कहा कि आडवाणी हमेशा उनके साथ परिवार के सदस्य जैसा व्यवहार करते थे और उन्हें ‘हैप्पी’ उपनाम से जानते थे। उन्होंने यह भी कहा कि आडवाणी जैसे नेताओं की कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता के कारण भाजपा की लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि हुई, जबकि कांग्रेस की सीटों में गिरावट आई।

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