दिल्ली : ब्रिटेन की प्रस्तावित माफी में उपनिवेशवाद का जिक्र नहीं होना समझ से परे : थरूर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 1 नवंबर 2026

दिल्ली : ब्रिटेन की प्रस्तावित माफी में उपनिवेशवाद का जिक्र नहीं होना समझ से परे : थरूर

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नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने अटलांटिक पार दास व्यापार में ब्रिटेन की भूमिका के लिए माफी मांगने पर विचार करने संबंधी ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा है कि प्रस्तावित क्षमा में उपनिवेशवाद का उल्लेख नहीं होना समझ से परे और अक्षम्य है। बर्नहम ने कहा था कि उनकी सरकार अटलांटिक पार दास व्यापार में ब्रिटेन की भूमिका के लिए पहली बार औपचारिक माफी मांगने पर विचार करेगी। ब्रिटेन, अफ्रीका और कैरेबियाई देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बर्नहम ने शनिवार को समाचार पत्र ‘द गार्डियन’ में लिखे एक आलेख में कहा कि राष्ट्रमंडल की रक्षा के लिए ब्रिटेन को अपने ‘जटिल इतिहास’ को स्वीकार करना होगा। राष्ट्रमंडल 56 स्वतंत्र देशों का संगठन है, जो कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा थे। बर्नहम इस सप्ताह राष्ट्रमंडल नेताओं की बैठक में हिस्सा लेने एंटीगुआ और बारबुडा जाएंगे। 


खबरों के मुताबिक, बर्नहम ने कहा कि राष्ट्रमंडल के जिन सदस्य देशों पर दास व्यापार का असर पड़ा है, वे लंबे समय से इसके परिणामों पर ईमानदार बातचीत की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस के लोकसभा सदस्य थरूर ने ‘एक्स’ पर शनिवार को एक पोस्ट में कहा कि वह लंबे समय से यह दलील देते रहे हैं कि ब्रिटेन की ओर से दिए जाने वाले किसी भी संभावित मुआवजे की कोई विश्वसनीय राशि तय नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन उपनिवेशवाद के विनाशकारी प्रभावों के लिए नैतिक प्रायश्चित अनिवार्य है। मुझे यह जानकर खुशी है कि प्रधानमंत्री बर्नहम दासता की भयावहता के लिए ब्रिटिश सरकार की ओर से औपचारिक माफी मांगने को तैयार हैं। लेकिन उनकी माफी में उपनिवेशवाद का जिक्र नहीं होना समझ से परे और अक्षम्य है।’’ थरूर ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि ब्रिटेन ने अब तक औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के कारण लाखों निर्दोष लोगों पर हुए लूट, विनाश और मौतों के लिए साधारण शब्दों में भी माफी नहीं मांगी है। थरूर की पुस्तक ‘इनग्लोरियस एम्पायर: व्हाट द ब्रिटिश डिड टू इंडिया’ में भी ब्रिटिश उपनिवेशवाद और भारत की संपत्ति की व्यवस्थित लूट का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। अटलांटिक पार दास व्यापार इतिहास का सबसे बड़ा जबरन मानव विस्थापन था, जिसके तहत 16वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी के मध्य तक लगभग 1.25 करोड़ अफ्रीकी लोगों को बंधक बनाकर अटलांटिक महासागर के पार अमेरिका और कैरिबियन देशों में ले जाया गया था।

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