इसमें कई सिख नेता भी शामिल हुए। सिख बहुल हरि नगर से तिलक नगर इलाके तक निकाले गये विरोध मार्च में प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस और गांधी के खिलाफ नारेबाजी की तथा 1984 में सिखों की हत्या के लिए उनसे माफी मांगने की मांग की। मार्च से पहले प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए पुरी ने 1984 की हिंसा शुरू होने के समय जिनेवा में होने का जिक्र किया और बताया कि किस तरह दिल्ली में रह रहे उनके माता-पिता की उनके हिंदू मित्रों ने रक्षा की थी। पुरी ने कहा, ‘‘आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हिंसा के दौरान दिल्ली में कुल 2,733 सिखों की निर्मम हत्या की गई थी। अदालतों ने भी इसे सुनियोजित नरसंहार, जनसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध बताया है, न कि अचानक भड़का कोई दंगा। कांग्रेस नेताओं को इस बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।’’ विरोध प्रदर्शन के दौरान काली पट्टी बांधे दिल्ली की मुख्यमंत्री गुप्ता ने याद किया कि हिंसा के दौरान उनके माता-पिता के घर में एक सिख पड़ोसी ने शरण ली थी। उन्होंने कहा कि हिंसा के कारण लाखों सिखों को अपनी पहचान छिपाने और जान बचाने के लिए अपने बाल कटवाने पड़े थे। विरोध प्रदर्शन में अन्य वक्ताओं ने रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिखों के खिलाफ व्यापक हिंसा 31 अक्टूबर को शुरू हुई थी और तीन नवंबर तक जारी रही थी। उन्होंने कहा कि एक नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों के घाव आज भी ताजा हैं। उन्होंने एक नवंबर को रैली आयोजित करने के लिए कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि इससे सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के रामलीला मैदान में रविवार को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिमी दिल्ली के हरि नगर में विरोध मार्च निकाला और 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस तथा उसके नेता राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की। विरोध मार्च का नेतृत्व करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 1984 में सिखों के खिलाफ हुई हिंसा एक ‘‘सुनियोजित’’ नरसंहार था, न कि दंगा या अचानक हुई घटना। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एच एस फूलका ने इस मार्च में हिस्सा लिया।

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