पटना विश्वविद्यालय के बर्खास्त प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी अपनी बर्खास्तगी के आदेश को वापस लेने की मांग को लेकर गुरुवार को राजभवन तक ‘साष्टांग मार्च' किया. उन्होंने साष्टांग मार्च पटना उच्च न्यायालय स्थित अम्बेडकर की मूर्ति के पास से प्रारम्भ किया.पुलिस ने हालांकि उन्हें राजभवन के पहले ही रोक दिया. ने किया
उनके साथ उनकी प्रेमिका जूली सहित करीब एक दर्जन लोग मांगों के समर्थन में तख्तियां लिए हुए थे.
मटुकनाथ ने कहा कि उनकी बर्खास्तगी गैरकानूनी है और उनकी अपील पर राजभवन सचिवालय द्वारा सुनवाई में देरी की जा रही है.उन्होंने कहा कि अपनी बर्खास्तगी को लेकर उन्होंने करीब ढाई वर्ष पूर्व अपील की थी, लेकिन इस पर अब तक सुनवाई नहीं हुई है.
चौधरी के अनुसार इस साष्टांग मार्च का उद्देश्य राज्यपाल का ध्यान आकृष्ट कराना है. उन्होंने कहा, जैसे लोग भगवान के दरबार में साष्टांग करते हुए पहुंचते हैं, उसी तरह हमने भी राज्यपाल के यहां सष्टांग करते हुए जाने का प्रयास किया. अगर उनके मामले में कोई सुनवाई नहीं होती है तो 24 अप्रैल से वह आमरण अनशन पर बैठेंगे. विभिन्न आरोपों को लेकर मटुकनाथ को जुलाई 2006 में निलम्बित किया गया था तथा बाद में 20 जुलाई 2009 को बर्खास्त कर दिया गया था.

2 टिप्पणियां:
जाने कब इनके दिन बहुरेंगे...
इनका साष्टांग मार्च सफल हो.
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