झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने गुरुवार को कहा कि 19 लोगों की हत्या के लिए चार नक्सलियों को सुनाया गया मृत्युदंड कठोर सजा है। उन्होंने कहा कि यदि वे समाज की मुख्यधारा में आने को राजी हों तो उन्हें माफ कर दिया जाना चाहिए।
मरांडी का पुत्र अनूप मरांडी भी 2007 के नरसंहार में मारा गया था। मरांडी ने कहा कि मुझे मृत्युदंड के बारे में पता चला है। मुझे लगता है कि यह सजा कठोर है। यदि दोषी ठहराये गए नक्सली समाज की मुख्यधारा में आने को राजी हों तो उन्हें माफ कर दिया जाना चाहिए।
मरांडी ने जमशेदपुर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार को नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने का रास्ता खोलना चाहिए। इस नरसंहार के लिए चार नक्सलियों-जीतन मरांडी, छत्रपति मंडल, मनोज राजवार और अनिल राजवार को दोषी ठहराते हुए गिरीडीह जिले के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आई डी मिश्रा ने गुरुवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
26 अक्टूबर 2007 को करीब 100 नक्सलियों ने गिरीडीह जिले के चिल्खारी गांव में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान हमला करके 19 लोगों की हत्या कर दी थी।

1 टिप्पणी:
taki khule aam apraadh ho.
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