कविता : नारी के बिना - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 19 अगस्त 2022

कविता : नारी के बिना

नारी बिना संसार अधूरा है।


खुशबू बिना जैसे फूल अधूरा है।।


जैसे संसार बिना इंसान अधूरा है।


धरती बिना अंबर अधूरा है।।


बिना सांस जैसे जिस्म अधूरा है।


वैसे ही नारी बिना जीवन अधूरा है।।


नारी बिना घर अधूरा है।


बाती बिना जैसे दीपक अधूरा है।


वैसे ही नारी बिना हर रिश्ता अधूरा है।।




सोनू आर्य
सोनू आर्य

मिकिला, कपकोट

बागेश्वर, उत्तराखंड

(चरखा फीचर)

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