कविता : अधूरे सपने - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 30 नवंबर 2025

कविता : अधूरे सपने

अपने सपनों वो को पूरा करना चाहती है,

हर मंजिल को वह पा लेना चाहती है,

समाज में इस कदर बदलाव लाना चाहती है,

कि पुरानी सोचों को नया मोड़ दिखाना चाहती है,

लड़कियों को इस कदर आगे रखना चाहती है,

हर लड़की को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है,

हर अधूरे सपनों को वह पूरा करना चाहती है।।



Saroj-ganv-ki-awaz


सरोज

चौरा कपकोट

बागेश्वर, उत्तराखंड

गांव की आवाज 

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