कविता : मन की गहराई - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 30 नवंबर 2025

कविता : मन की गहराई

शायद उसके जन्म पर कोई भूचाल आया होगा,

लड़की हो गई गांव में, खबर अखबार में छाया होगा,

उम्मीद लगाईं दादी का सपना तार-तार हुआ होगा,

बस लड़की हो गई, इस बात का खौफ छाया होगा,

उसके दुख पर भी मां ने प्यार से सर सहलाया होगा,

पापा ने जीवन का कोई रास्ता समझाया होगा,

आग की चिंगारी जैसे तुझे चमकना होगा,

इस भेदभाव के खिलाफ खुद तुझे लड़ना होगा,

तुझे अपनी मंज़िल तक पहुंचना होगा,

अपनी उड़ान के लिए खुद पंख फैलाना होगा,

दुनिया की बातें भूल कर आगे बढ़ना होगा,

आपने साथ होने वाले हर अन्याय में बोलना होगा,

अपने मन की इच्छाओं से जीना होगा,

उम्मीद छोटी होगी, मगर बढ़ते रहना होगा




Ritika-ganv-ki-awaz


रितिका

उम्र-18 वर्ष

उत्तराखंड

गांव की आवाज

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