- संकल्प नशा मुक्ति केंद्र में संगोष्ठी आयोजित, संचालक राहुल सिंह बोले-जिंदगी अनमोल है, इसे सहेजना जरूरी
मानसिक अवसाद, नशा और दबाव प्रमुख कारण
संगोष्ठी में आत्महत्या के पीछे जिम्मेदार विभिन्न परिस्थितियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने मानसिक अवसाद, नशे की लत, पारिवारिक समस्याओं तथा शैक्षिक दबाव जैसे कारणों पर प्रकाश डाला। बताया गया कि कई बार व्यक्ति लगातार तनाव और परेशानी के बीच यह महसूस करने लगता है कि उसके सामने कोई रास्ता नहीं बचा है। ऐसे समय में समय पर बातचीत और सहयोग बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। वक्ताओं ने कहा कि किसी व्यक्ति की बात को गंभीरता से सुनना भी मदद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। एक-दूसरे की बात सुनकर, परेशान व्यक्ति को अकेला न छोड़कर और समय पर उचित मदद उपलब्ध कराकर कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
संतों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया शुभारंभ
दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कार मंच के संयोजक जितेन्द्र तिवारी, संत माधवदास महाराज, सनातन सेना के प्रदेश सचिव पवन केवट, मनोज दीक्षित मामा एवं आयुष गुप्ता सहित अन्य अतिथियों ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने आत्महत्या रोकथाम और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
सवाल-जवाब के माध्यम से दूर की गईं भ्रांतियां
संगोष्ठी के दौरान उपस्थित लोगों ने भी विषय से जुड़े सवाल पूछे। ओमकार सहित अन्य लोगों ने अकेलापन कैसे दूर किया जाए और कठिन परिस्थितियों से किस तरह बाहर निकला जा सकता है, जैसे प्रश्न वक्ताओं के समक्ष रखे। वक्ताओं ने सवालों का समाधान करते हुए कहा कि किसी भी परेशानी को लेकर अकेले संघर्ष करने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति से बातचीत करना चाहिए तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
गुरुवार को होगा दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन गुरुवार को किया जाएगा। आयोजन के माध्यम से लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना संवाद, सहयोग और सकारात्मक सोच के साथ किया जा सकता है। वक्ताओं ने समाज के प्रत्येक व्यक्ति से अपील की कि वे अपने आसपास के लोगों के प्रति संवेदनशील रहें और किसी को मानसिक परेशानी में अकेला न छोड़ें।

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