वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हो रहा देव ऋषि पितृ तर्पण-
कार्यक्रम में क्षेत्र के आचार्य पं. सुनील शर्मा बरखेड़ा, पं. दीपक शर्मा और पं. गणेश शर्मा उज्जैन द्वारा प्रतिदिन शास्त्रोक्त विधि से पूजन अर्चन संपन्न कराया जा रहा है। देव, ऋषि और पितृ स्मरण के साथ जो तिलकुशा और तीर्थ जल से तर्पण किया जा रहा है। इसके उपरांत पुरोहित द्वारा पितृ भागवत कथा का आनंदमय वाचन किया जा रहा है, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पितृलोक से पृथ्वी पर आते हैं आचार्य पंडित सुनील शर्मा ने पितृपक्ष के आध्यात्मिक व धार्मिक महत्व बताते हुए कहा कि पितृ भागवत और गरुण पुराण अनुसार पितृपक्ष के दौरान पितृगण पितृलोक से अपने परिजनों के बीच पृथ्वी लोक पर आते हैं। वे अपने वंशजों द्वारा श्रद्धा और भक्ति भाव से दी गई जलांजलि, तिल और अन्न को ग्रहण करते हैं। जो मनुष्य इस अवधि में नियमपूर्वक देव-ऋषि-पितृ तर्पण करता है, गौ सेवा करता है, ब्राह्मणों को भोजन कराता है तथा असहाय एवं जरूरतमंदों की सहायता करता है, उस पर पितृगण अत्यंत प्रसन्न होते हैं। जिस घर में पितरों की शांति के लिए भागवत कथा, तर्पण और दान पुण्य किया जाता है, वहां से पितृदोष समाप्त होता है और पितृगण प्रसन्न होकर पूरे परिवार को वंश वृद्धि, आरोग्यता, धन धान्य और सुख-समृद्धि का अमर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। आयोजन समिति के तरुण पाराशर बंदरिया हाट ने क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल पर उपस्थित होकर कथा श्रवण करें और पुण्य के भागीदार बनें। इस भक्तिमय आयोजन से संपूर्ण क्षेत्र का वातावरण धर्ममय और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया है।

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