सीहोर : पूर्वजों के प्रति समर्पण और कृतज्ञता का पर्व है श्रद्धा : पंडित ओमप्रकाश पाठक - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 28 सितंबर 2026

सीहोर : पूर्वजों के प्रति समर्पण और कृतज्ञता का पर्व है श्रद्धा : पंडित ओमप्रकाश पाठक

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सीहोर । प्रत्येक मनुष्य अपने धर्म और अपने पूर्वजों की परंपरा के अनुसार अपना जीवन का निर्धारण करता है और यही उसकी पहचान होती है हिंदू सनातन धर्म में हम अपने पितरों के प्रति समर्पण और कृतज्ञता को व्यक्त करने के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं और यह हम पूरे अपने मनोयोग और श्रद्धा से करते हैं उक्त विचार पंडित ओमप्रकाश पाठक  ने सिवन घाट स्थित बढ़िया खेड़ी स्थित बजरंग अखाड़ा परिसर पर पितृ तर्पण के के दौरान श्रद्धालुओं को व्यक्त व्यक्त किए l आचार्य पंडित ओमप्रकाश पाठक ने श्रद्धालुओं को पित्त तर्पण कर्म के विषय में बताया कि हम अपने पिता और मां की तीन पीढियां तक उनके गोत्र नाम लेकर तर्पण करते हैं हम अपने गुरु, मित्र गणों देवता ऋषि और इस जन्म व पूर्व जन्म के पितरों के प्रति भी अपना कर्तव्य निभाते हुए तर्पण करते हैं और उनके निमित्त श्राद्ध पक्ष पितृपक्ष में गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन और जरूरतमंदों की सेवा करते हैं l इस बार पितृपक्ष भाद्रपद मास पूर्णिमा शनिवार से प्रारंभ होकर अश्विन मास् कृष्ण पक्ष शनिवार पितृमोक्ष अमावस्या 10 अक्टूबर तक रहेगा  l प्रतिदिन जो, तिल, तीर्थ जल आदि सामग्री लेकर पूर्व उत्तर और दक्षिण दिशा में अपने पितरों के निमित्त जलांजलि देंगे l  भगवान द्वारा निर्मित इस प्रकृति के संरक्षण के लिए और अपने  पितरों के निर्मात हमें पीपल को जल देना चाहिए और शाम के समय दीपक भी लगाना चाहिए l मनुष्य को अपने पितरो के निमित्त ब्राह्मण द्वारा गीता पाठ अवश्य करवाना चाहिये, जिन   मनुष्य को अपने पितरों के निमित्त पितृ भागवत या पितृ सूक्त का पाठ करना चाहिए l जिन मनुष्यों को पितृ दोष है उन्हें गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना लाभप्रद है ।

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