- डमरू टीम, बैंड-बाजे और लहंगी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां, दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
- 75 वर्षों से चली आ रही परंपरा में शामिल होने उमड़े भक्त, डोल के नीचे से निकलकर लिया आशीर्वाद
देवनगर, बढ़ियाखेड़ी सहित प्रमुख मार्गों से निकला डोल
भगवान श्री नृसिंह का भव्य डोल कोलीपुरा से प्रारंभ होकर देवनगर कॉलोनी, बढ़ियाखेड़ी, नदी चौराहा, कोतवाली चौराहा सहित शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरा। डोल के साथ बैंड-बाजे, डमरू टीम और लहंगी कलाकार चल रहे थे। पारंपरिक प्रस्तुतियों और धार्मिक गीतों से पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा वातावरण बना रहा। श्रद्धालु अपने घरों और मार्ग के आसपास खड़े होकर भगवान के दर्शन करते रहे। डोल करीब 10 घंटे से अधिक समय तक नगर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण करता रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए और पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
डोल के नीचे से निकलने की परंपरा में शामिल हुए श्रद्धालु
संत माधवदास महाराज और मंदिर समिति के अध्यक्ष दुर्गेश यादव ने बताया कि डोल ग्यारस के अवसर पर वर्षों से श्रद्धालुओं के डोल के नीचे से निकलने की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक आस्था के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्री नृसिंह का आशीर्वाद प्राप्त करने की भावना से डोल के नीचे से निकलते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था देखने को मिली। उन्होंने बताया कि श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर का डोल अपनी भव्यता और लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा के कारण सीहोर शहर के साथ ही आसपास के क्षेत्रों में भी विशेष पहचान रखता है। डोल ग्यारस के आयोजन का श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष इंतजार रहता है। भगवान के डोल में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकलते ही बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
75 वर्षों से निरंतर चली आ रही धार्मिक परंपरा
श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर से डोल निकालने की परंपरा 75 वर्षों से अधिक समय से निरंतर चली आ रही है। पीढ़ियों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा के प्रति शहर और आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। डोल ग्यारस के दिन भगवान श्री नृसिंह का विशेष श्रृंगार किया जाता है और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद उन्हें डोल में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है। इस दौरान रास्ते भर श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर पुष्प अर्पित करते रहे। जगह-जगह लोगों ने पूजा-अर्चना की। डोल यात्रा के दौरान धार्मिक उत्साह और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने पूरे शहर को भक्तिमय बना दिया। आयोजन के दौरान मंदिर समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।

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