दीपके ने कहा, ‘‘अगर आपको पता है कि चुनावों में धांधली हो रही है तो आप इसमें भाग नहीं ले सकते हैं। आपको अपना रुख तय करना होगा।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ‘‘भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा’’ हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग पर यह तय करने का आरोप लगाया कि किसे मतदान करने की अनुमति दी जाएगी। दीपके ने सीईसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए कहा, ‘‘ज्ञानेश (कुमार) हमारा मताधिकार छीनने वाले होते कौन हैं?’’ कॉजपा ने तीन मांगें रखीं, जिनमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त का इस्तीफा, एसआईआर के दौरान लिये गए फैसलों की स्वतंत्र जांच, एसआईआर प्रक्रिया को रोकना और पहले की मतदाता सूची को बहाल करना तथा सभी संबंधित एसआईआर रिकॉर्ड और फाइलों को उच्चतम न्यायालय या स्वतंत्र न्यायिक निगरानी वाली जांच को सौंपना, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार शामिल है। इन मांगों में उन अधिकारियों की पहचान करना भी शामिल है, जिन्होंने विवादित बदलावों और निर्देशों को मंज़ूरी दी थी। इसके अलावा कॉजपा ने निर्वाचन आयुक्त संधू और जोशी से अपनी दर्ज आपत्तियों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने तथा निर्वाचन आयोग से संबंधित आपत्ति नोट और जवाब प्रकाशित करने की मांग की। कॉजपा के सह-संयोजक दास ने आरोप लगाया कि युवा मतदाताओं को सूची से बाहर रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, क्योंकि सत्तारूढ़ दल को लगता है कि 'जेन जी' उसका समर्थन नहीं कर रही है। दास ने कहा, ‘‘आज युवा कह रहे हैं कि बदलाव की जरूरत है। जीवन बदलने के लिए मताधिकार ही एकमात्र साधन है। अगर इसे छीन लिया जाएगा तो देश कैसे आगे बढ़ेगा?’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘युवाओं को मतदाता बनने से रोका जा रहा है... व्यवस्था पूरी तरह खोखली हो चुकी है। सरकार को लगता है कि 'जेन जी' उसके पक्ष में नहीं है, इसलिए उन्हें मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा रहा है।’’ कॉजपा प्रवक्ता रांका ने युवाओं से लोकतंत्र बचाने के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘हमें सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा... ज्ञानेश कौन होते हैं हमारा मताधिकार खत्म करने वाले?’’ रांका ने कहा, ‘‘युवा, नागरिक समाज और राजनीतिक दलों को देश को बचाने के लिए एक साथ आना होगा... हम ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा एवं उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हैं और इस सवाल का भी जवाब चाहते हैं कि ज्ञानेश को आदेश किसने दिए।’’
नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने बृहस्पतिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए उनपर "मतदाताओं के अधिकारों को कमजोर करने" का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर वह 48 घंटे के भीतर पद से नहीं हटते हैं तो ‘‘जंतर-मंतर 2.0’’ समेत राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया जाएगा। कॉजपा ने "इलेक्शन कमीशन ठीक करो" अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि यह अभियान विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने के मुद्दे पर केंद्रित होगा। कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में "धांधली" की गयी है और नागरिकों से मतदान का अधिकार छीना जा रहा है। इस अवसर पर पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका भी मौजूद थे। दीपके ने कहा, ‘‘अगर ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं तो हम दिल्ली में प्रदर्शन करने से पहले राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।’’ उन्होंने कहा कि अगर सीईसी इस्तीफा नहीं देते हैं तो निश्चित रूप से ‘‘जंतर-मंतर 2.0’’ होगा। कॉजपा ने कहा कि यदि सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो पार्टी राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेगी और इसके बाद दिल्ली में अनिश्चितकालीन धरना देगी। ये टिप्पणियां ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस खबर के एक दिन बाद आई हैं, जिसमें कहा गया था कि तीन-सदस्यीय निर्वाचन आयोग (ईसी) के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दो निर्वाचन आयुक्तों -सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी- ने बार-बार सवाल उठाए थे। पार्टी ने एसआईआर के दौरान कई राज्यों में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में दो करोड़ से अधिक, उत्तर प्रदेश में दो करोड़ से अधिक, कर्नाटक में करीब एक करोड़, तमिलनाडु में 97 लाख, पश्चिम बंगाल में 90 लाख, तेलंगाना में 73 लाख, दिल्ली में 47 लाख और केरलम में 24 लाख नाम हटाए गए हैं। दीपके ने कहा, ‘‘लोकतंत्र का अर्थ है कि लोग अपनी सरकार चुनते हैं। (लेकिन) यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि निरंकुशता है। ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में हम ऐसी चुनावी व्यवस्था देख रहे हैं, जिसमें निर्वाचन आयोग यह तय कर रहा है कि मतदाता सूची में कौन रहेगा और कौन नहीं। जब प्रारूप मतदाता सूची से लाखों नाम गायब हो सकते हैं तो आयोग की जिम्मेदारी है कि वह यह साबित करे कि हर नाम हटाने की कार्रवाई कानूनी, पारदर्शी है और उसकी ठीक से समीक्षा की गई है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्षी दलों को लगता है कि चुनावों में धांधली हो रही है तो उन्हें इसमें भाग नहीं लेना चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें