- प्रयागराज की रामलीला मंडली के कलाकारों ने बिखेरी अभिनय की छटा, कुंभकर्ण व रावण वध के साथ सम्पन्न हुआ मंचन
रामलीला के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मंचन देखने पहुंचे। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत कर दिया। कुंभकर्ण वध के दृश्य ने दर्शकों को आकर्षित किया। इसके बाद भगवान राम और रावण के बीच युद्ध का मंचन किया गया। युद्ध के अंतिम चरण में भगवान राम ने रावण का वध किया। इस दृश्य के साथ ही दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। रामलीला के मंचन के दौरान लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। कलाकारों की प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा। धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से भगवान राम के आदर्शों और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। रामलीला के अंतिम दिन आयोजन स्थल पर देर तक उत्सव जैसा माहौल बना रहा। कलाकारों ने रावण वध, लक्ष्मण द्वारा रावण से ज्ञान प्राप्ति, विभीषण का लंकापति के रूप में राज्याभिषेक तथा भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या आगमन के प्रसंगों को जीवंत किया। तत्पश्चात श्रीराम के राज्याभिषेक और माता सीता की अग्निपरीक्षा का मंचन देख दर्शक भावविभोर हो उठे। इस गरिमामयी अवसर पर संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक दौर में रामलीला जैसे भव्य आयोजनों का होना सनातन धर्म की जड़ों को मजबूत करने और समाज में जागृति लाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। रामलीला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ी को जीवन जीने की कला, मर्यादा और उच्च संस्कार देती है। भगवान राम का चरित्र हर युग में प्रासंगिक है और उनके आदर्शों को जीवन में उतारकर ही एक श्रेष्ठ समाज का निर्माण किया जा सकता है।

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