दरअसल देश में मांग और आपूर्ति से लेकर निर्यात तक मेंं लगातार विकास देखा जा रहा है। देश में मांग और आपूर्ति की बेहतर हालात है तो निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। यह भी तब जब वैष्विक मांग कमजोर देखी जा रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे सकारात्मक बात यह है कि एमएसएमई सेक्टर में लगातार अच्छा काम हो रहा है तो दूसरी और सर्विस सेक्टर में तो एक तरह से लगातार उछाल ही आ रहा है। कच्चे तेल के भावों में तो जैसे आग ही लग रही है और उपलब्धता को लेकर भी लाख झंझट के बावजूद हकोनोमी को बूस्टअप रखने में खास बाधा नहीं आ रही है। देश में देसी-विदेशी निवेश में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। महगाई के बावजूद बाजार मेंं मांग बरकरार है। बाजार में मांग से यह साफ है कि लोगों की क्रय शक्ति बनी हुई है। सर्विस सेक्टर में टूरिज्म, बैंकिंग, आईटी, और इसी तरह के अन्य क्षेत्र उल्लेखनीय परिणाम दे रहे हैं। नवंबर में दीपावली के त्यौहार के चलते बाजार और अधिक गतिशील हो जाएगा क्योंकि दीपावली पर बाजार में तेजी आती ही आती है। जानकारों की माने तो नवंबर माह में दीपावली पर 7 लाख करोड़ का कारोबार अनुमानित किया जा रहा है। यह पिछली दीपावली की तुलना में 15 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक अधिक रहने की संभावना है। इसी तरह से सेवा क्षेत्र मेंं भी अच्छी ग्रोथ जारी रहने का अनुमान है। इसके अलावा विपरीत हालातों के बावजूद निर्यात में लगातार बढ़ोतरी जारी है। देश की इकोनोमिक ग्रोथ के कारण देसी-विदेशी निवेश के बेहतर हालात दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि चाहे आईएमएफ हो या मूडीज, ओईसीडी हो या वर्ल्ड बैंक, एशियन डब्लपमेंट बैंक हो या एसएण्डपी या फिच सभी ने भारत की इकोनोमी की ग्रोथ को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।
भारत का आरबीआई का आंकलन तो पहले से ही सबके सामने हैं। एकमात्र फिच रेटिंग संस्था ऐसी है जिसने इंडियन इकोनोमी की ग्रोथ रेट 6.9 प्रतिशत आंकी है जोकि हांलाकि पूर्व की फिच की ही पूर्व की रेटिंग 6.5 प्रतिशत से ही अधिक है। मूडीज सहित कुछ रेटिंग संस्थाओं ने जहां अब 7 प्रतिशत विकास दर आंक रहे हैं तो वर्ल्ड बैंक, ओईसीडी आदि संस्थाओं को भरोसा है कि भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत से अधिक यानी की 7.1 प्रतिशत रहने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नित नए निर्णयों से दुनिया की अर्थ व्यवस्था पर पड़ रहे असर, युद्ध और तनाव के हालातों में सुधार नहीं होने, हार्मुज जैसी समस्या का समाधान नहीं होने, वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता के दौर के बावजूद एक ही सधी हुई नीति का ही परिणाम है कि देश की अर्थ व्यवस्था विकास की गति को ना केवल बनाए हुए हैं अपितु उसकी विकास का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके लिए समग्र और समन्वित प्रयासों को श्रेय जाता है। जहां घरेलू मांग में कमी नहीं आई है वहीं निवेश का बेहतर माहौल बना हुआ है। एमएसएमई को उत्पादन लिंक प्रोत्साहन योजना का लाभ सीधे इकोनोमी का मिल रहा है वहीं रणनीतिक क्षेत्रों सेमी कण्डक्टर, डिफेंस, इलेक्ट्रोनिक्स, आईटी आदि आदि क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ा जा रहा है। यही कारण है कि आज इंडियन इकोनोमी और उसकी ग्रोथ पर वैश्विक रेटिंग संस्थाएं अपना विश्वास व्यक्त कर रही है।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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