विशेष : गांव को विकास के लिए पक्की सड़क चाहिए - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

विशेष : गांव को विकास के लिए पक्की सड़क चाहिए

Rural-development
किसी गांव के विकास का आकलन करते समय यह भी देखना जरूरी है कि वहां तक पहुंचने का रास्ता कैसा है और उससे गुज़रने वाले लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है? क्योंकि सड़क किसी गांव को केवल शहर से नहीं जोड़ती है, बल्कि उसे बुनियादी ज़रूरतों तक आसानी से पहुंचने का अवसर भी देती है। इस तर्क के बावजूद देश के अनेक ऐसे ग्रामीण इलाके हैं, जहां आज भी लोग कच्ची और जर्जर सड़कों से गुज़रने को मजबूर हैं।  राजस्थान के बीकानेर जिला स्थित लूणकरणसर ब्लॉक से करीब 20 किमी दूर कुजटी गांव इसकी एक मिसाल है। लगभग 2,500 की आबादी वाले इस गांव को आज भी पक्की सड़क का इंतजार है। कच्ची सड़क पर चलना बाहर से देखने वालों को भले ही मामूली परेशानी लगे, लेकिन वहां रहने वाले लोगों के लिए यह रोज की चुनौती है। रेत की धूल उड़ाती सड़क से गुजरते समय लोगों के लिए गर्मी और बारिश के मौसम में यात्रा करना कठिन हो जाता है। 


गांव से बाहर पढ़ने जाने वाले विद्यार्थियों, काम के लिए कस्बे तक पहुंचने वाले लोगों और जरूरी सामान लाने-ले जाने वाले परिवारों के लिए सड़क की स्थिति सीधे उनके समय, सुविधा और अवसरों को प्रभावित करती है। किसी आपात स्थिति में मरीज को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। सड़क की कमी का असर केवल दूरी तय करने में लगने वाले समय पर नहीं पड़ता, बल्कि यह तय करने में भी पड़ता है कि कोई व्यक्ति जरूरत पड़ने पर कितनी आसानी से जरूरी सेवाओं तक पहुंच सकता है। इस समस्या का असर महिलाओं और लड़कियों के जीवन में विशेष रूप से दिखाई देता है। ग्रामीण क्षेत्रों में घर और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के लिए भी बाहर जाना पड़ता है। यदि रास्ता असुविधाजनक हो, तो उनकी आवाजाही और कठिन हो सकती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए भी सुरक्षित तथा सुविधाजनक आवागमन जरूरी है। कई बार दूरी कम होने के बावजूद खराब रास्ते के कारण यात्रा में अधिक समय और मेहनत लगती है। ऐसे में पक्की सड़क का निर्माण केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि लोगों के समय, श्रम और सम्मान से जुड़ा सवाल है। गांव की सड़क अच्छी होगी, तो लड़कियों के लिए स्कूल या कॉलेज तक पहुंचना, महिलाओं के लिए स्वास्थ्य केंद्र जाना और परिवारों के लिए रोजगार के अवसर तलाशना अधिक आसान हो सकता है।


देश में ग्रामीण सड़क संपर्क को मजबूत करने के लिए दिसंबर 2000 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य निर्धारित पात्रता मानकों के अनुरूप उन ग्रामीण बसावटों को हर मौसम में उपयोगी सड़क संपर्क उपलब्ध कराना था, जो सड़क से नहीं जुड़ी थीं। बाद में योजना के अलग-अलग चरणों के माध्यम से ग्रामीण सड़कों के उन्नयन और प्रमुख ग्रामीण मार्गों को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया गया। इस पहल से देश के ग्रामीण बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय बदलाव आया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के सभी चरणों के तहत 16 जुलाई 2026 तक देश में कुल 7,97,020 किलोमीटर सड़क निर्माण पूरा हो चुका था। इसी अवधि तक 1,62,876 ग्रामीण बसावटों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराया गया था। राजस्थान में भी इस योजना के तहत 76,177 किलोमीटर सड़क निर्माण पूरा हुआ और 15,970 बसावटें सड़क संपर्क से जुड़ीं। हालांकि, इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि देश या राज्य के प्रत्येक गांव की हर सड़क पक्की हो चुकी है। सड़क संपर्क से जुड़े आंकड़ों और गांवों के भीतर मौजूद सभी सड़कों की स्थिति में अंतर है। इसलिए योजना की उपलब्धियों के साथ उन इलाकों की वास्तविक जरूरतों को भी समझना जरूरी है, जहां अब भी पक्की सड़क की मांग बनी हुई है।


कुजटी गांव की स्थिति इसी अंतर की ओर ध्यान दिलाती है। लगभग 2,500 लोगों की आबादी वाले इस गांव में पक्की सड़क का अभाव बताता है कि ग्रामीण विकास का आकलन केवल राज्य या देश के कुल निर्माण आंकड़ों के आधार पर नहीं किया जा सकता। यह जानना भी जरूरी है कि किस गांव तक सड़क पहुंची है, किस गांव में सड़क निर्माण की जरूरत अब भी बाकी है और किन रास्तों की स्थिति सुधारने की आवश्यकता है। कुजटी के लोगों के लिए यह सवाल किसी सरकारी रिपोर्ट का हिस्सा भर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ है। जब आसपास के क्षेत्रों में पक्की सड़कें नजर आती हैं, तो अपने गांव में ऐसी सुविधा का इंतजार स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में सवाल पैदा करता है। वास्तव में, सड़क किसी गांव के लिए भविष्य की संभावनाओं का रास्ता खोलती है। इससे किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने, विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने, महिलाओं को स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाओं तक पहुंचने तथा परिवारों को जरूरी सेवाओं का लाभ लेने में मदद मिलती है। इसलिए ग्रामीण सड़क को केवल निर्माण की एक परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि समान अवसरों की बुनियादी शर्त के रूप में देखना चाहिए। जब किसी गांव के लोगों को धूल भरी कच्ची राहों से निकलकर पक्की सड़क पर चलने का अवसर मिलेगा, तभी ग्रामीण विकास का लाभ उनके रोजमर्रा के जीवन में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।






Raveena-ganv-ki-awaz

रवीना

लूणकरणसर, राजस्थान

टीम, गाँव की आवाज़

(यह लेखिका के निजी विचार हैं)

कोई टिप्पणी नहीं: