उन्होंने कहा, ‘‘दोनों पक्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी तथा गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल जारी रखे हुए हैं।’’ जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्षों ने सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए उपयुक्त क्षेत्रों में एलएसी की समझ को बेहतर करने के तरीकों पर चर्चा को लेकर भी सहमति जताई है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस बात पर भी जोर देना चाहूंगा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।’’ आईटीबीपी के महानिदेशक ने बृहस्पतिवार को राजस्थान के अलवर में अपने संबोधन में यह भी कहा कि आईटीबीपी ने अपनी सभी सीमा इकाइयों में ड्रोन प्लाटून गठित की हैं और गलवान जैसी झड़प से बेहतर ढंग से निपटने के लिए एक नया ‘स्ट्राइक’ पाठ्यक्रम तैयार किया है। गलवान घाटी में 2020 में हुई हिंसक झड़पों और उसके बाद चार साल से भी ज़्यादा समय तक सैन्य गतिरोध के कारण भारत और चीन के रिश्तों में भारी तनाव आ गया था। इस तनाव के बाद, अपने संबंधों को फिर से सुधारने के लिए दोनों देशों ने पिछले एक साल में कई कदम उठाए हैं। अक्टूबर 2024 में दोनों देशों ने पूर्वी लद्दाख में टकराव के अंतिम दो स्थानों देपसांग और डेमचोक से सैनिकों को पीछे हटाने के समझौते को अंतिम रूप दिया था।
नई दिल्ली। भारत ने शुक्रवार को कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति समय-समय पर तब बिगड़ जाती है, जब चीनी सैनिक गश्त के निर्धारित तौर-तरीकों से हटकर गतिविधियां करते हैं। भारत ने इस बात पर भी जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति एवं सौहार्द बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की यह टिप्पणी, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के उस बयान के जवाब में आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में सीमावर्ती इलाकों में चीनी सैनिकों के साथ टकराव की घटनाएं लगातार हो रही हैं। जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘जैसा कि हमने पहले भी कहा है, भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति समय-समय पर तब बिगड़ जाती है, जब चीनी सैनिक गश्त के निर्धारित तौर-तरीकों से हटकर गतिविधियां करते हैं।’’

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