नेतन्याहू ने चुनाव में धांधली के आरोप दोहराये, अरब दलों के साथ सहयोग से किया इनकार - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

नेतन्याहू ने चुनाव में धांधली के आरोप दोहराये, अरब दलों के साथ सहयोग से किया इनकार

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इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बृहस्पतिवार को अरब नेतृत्व वाले दलों पर चुनाव में धांधली के आरोप दोहराते हुए विदेशी हस्तक्षेप का संदेह जताया और पुलिस तथा देश की शीर्ष आंतरिक सुरक्षा एजेंसी से तत्काल जांच की मांग की। नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में केंद्रीय निर्वाचन समिति (सीईसी) के प्रमुख न्यायमूर्ति नोआम सोलबर्ग के उस फैसले का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने मंगलवार को हुए चुनाव में विदेशी वित्तपोषण और अनुचित प्रभाव के संदेह की जांच करने के लिए खुफिया एजेंसी शिन बेट प्रमुख डेविड जिनी से आग्रह किया था। नेतन्याहू ने अरब नेतृत्व वाले दलों और विपक्षी गठबंधन को निशाना बनाते हुए लिखा, ‘‘उन्होंने इजराइल में चुनाव चुरा लिया।’’ नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि विदेशी संस्थाओं ने मंगलवार को हुए संसदीय चुनाव में हस्तक्षेप किया और अरब नेतृत्व वाले दलों के पक्ष में मतदाताओं को रिश्वत दी।

 

ये आरोप ऐसे चुनाव के बीच लगाए गए हैं, जिसमें 120 सदस्यीय नेसेट (संसद) में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। न तो नेतन्याहू के गठबंधन और न ही पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ है। मतगणना के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, नेतन्याहू के खेमे को 53, जबकि आइजेनकोट नीत गठबंधन को 48 सीटें मिलने का अनुमान है। अरब नेतृत्व वाले दलों को 19 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया। नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। नेतन्याहू (77) ने दावा किया कि कथित हस्तक्षेप का उद्देश्य इजराइल की संसद पर विदेशी नियंत्रण स्थापित करना, ‘‘इजराइल का इस्लामीकरण’’ करना और दक्षिणपंथी शासन को समाप्त करना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसी सरकार बनने से इजराइली सेना को पीछे हटना पड़ सकता है, खासकर ईरान के साथ संघर्ष में। नेतन्याहू ने कहा कि किसी भी यहूदी दल को अरब नेतृत्व वाले दलों के साथ सहयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नेसेट के नेतृत्व में बदलाव और ऐसी सरकार के गठन के लिए नकदी देकर वोट खरीदे गए, जो इजराइल के लिए खतरा पैदा कर सकती है।

 

नेतन्याहू ने पुलिस और शिन बेट से कथित विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े अपराधों की जांच के लिए सभी उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल करने का भी आह्वान किया। इससे पहले, केंद्रीय निर्वाचन समिति के प्रमुख सोलबर्ग ने शिन बेट प्रमुख जिनी को पत्र लिखकर विदेशी संस्थाओं से वित्तपोषण के जरिये चुनाव को अनुचित रूप से प्रभावित करने के संदेह की जांच करने को कहा था। आरोप है कि ये संस्थाएं इजराइल के हितों के खिलाफ काम कर रही थीं। सोलबर्ग ने कहा कि वह इन संदेहों की सत्यता की पुष्टि नहीं कर सकते, लेकिन उन्होंने विस्तृत जांच को जरूरी माना। उन्होंने एक सप्ताह के भीतर जांच के निष्कर्ष पेश करने का निर्देश दिया। पत्र में कथित रूप से शामिल देशों के नाम नहीं बताए गए और न ही संदिग्ध हस्तक्षेप के बारे में अतिरिक्त जानकारी दी गई। स्थानीय मीडिया की खबरों के अनुसार, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी का मानना है कि अरब मतदाताओं को मतदान के लिए जुटाने में शामिल संगठनों को कथित तौर पर कतर और तुर्किये से वित्तीय मदद मिली हो सकती हैं। पुलिस ने अरब दलों द्वारा चुनाव ‘‘चुराने’’ के लिकुड पार्टी के आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि इसके समर्थन में ‘‘कोई साक्ष्य नहीं’’ है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन और अरब नेतृत्व वाले दलों के पास मिलकर इतनी सीटें हैं कि वे वैकल्पिक सरकार को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि, विपक्षी नेताओं में इस बात पर मतभेद हैं कि अरब दलों को गठबंधन सरकार में शामिल होना चाहिए या बाहर से समर्थन देना चाहिए। आइजेनकोट ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं और चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप के संदेह को लेकर उनसे जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

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