सीहोर : आज किया जाएगा भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणी विवाह का वर्णन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

सीहोर : आज किया जाएगा भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणी विवाह का वर्णन

  • भागवत कथा में लगाया छप्पन भोग, गोवर्धन पर्वत की पूजा हुई

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सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम लसुडिया परिहार में संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार को श्रीमद् भागवत कथा में भगवान बालकृष्ण लल्ला के मनोहर चरित्र बाल लीला का कथा व्यास पंडित पंकज कृष्ण महाराज ने रोचक वर्णन किया । इस दौरान छप्पन भोग लगाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा अर्चना की गई ।भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाललीलाओं के अलावा गोवर्धन पूजन का महत्व और छप्पन भोग की आरती सजाई गई थी। उन्होंने कहाकि बुद्धि अल्पज्ञ और ईश्वर सर्वज्ञ है। बुद्धि प्रकाशित और ईश्वर प्रकाशमान है। मन की दो परिस्थिति होती हैं, भय और लोभ। मन हमेशा भय या लोभ से ग्रसित होता हैं। मन ही माया के बंधन में बंधा रहता है। अत मन ही बंधन का कारण है। इसलिए मन को गोविंद के चरणों में लगा दो। ईश्वर को जानकर ही कोई जीव माया से पार हो सकता है, इसका अन्य कोई मार्ग नहीं है किंतु हम ईश्वर को कैसे जाने, इसके उत्तर में वेदों-शास्त्रों से ढेरों प्रमाण देते हुए कहा कि ईश्वर को कोई जान ही नहीं सकता, क्योंकि ईश्वर इन्द्रिय, मन एवं बुद्धि से परे है। बुधवार को कथा व्यास पंडित पंकज कृष्ण महाराज ने गोवर्धन पूजन का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि इंद्र ने क्रोधित होकर भयंकर आंधी तूफान बारिश की। जिससे समस्त गोकुल में त्राहि-त्राहि मच उठी। रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर श्री गोवर्धन पर्वत को धारण किया एवं समस्त गोकुल वासी को शरण दी। इंद्र के कुपित होने पर भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था। अहंकार को नष्ट करने के लिए ही भगवान ने गोवर्धन की पूजन का क्रम आरंभ करवाया था। भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के अहंकार को नष्ट करने के लिए गोवर्धन पूजा कराई थी। 

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