दिल्ली : जिमखाना क्लब को खाली कराने के मामले की सुनवाई से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हुए अलग - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

दिल्ली : जिमखाना क्लब को खाली कराने के मामले की सुनवाई से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हुए अलग

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दिल्ली । उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने दिल्ली जिमखाना क्लब को सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ परिसर से हटाने की केंद्र की कार्रवाई से जुड़े मुकदमे की सुनवाई से बुधवार को खुद को अलग कर लिया। न्यायमूर्ति जालान ने निर्देश दिया कि ‘दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेल्फेयर एसोसिएशन’ की ओर से दायर मुकदमे को शुक्रवार को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। न्यायमूर्ति जालान ने कहा, ‘‘मैं इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर रहा हूं। कुछ ऐसे मामले होते हैं, जिनमें व्यक्ति को अपने ही फैसले पर भरोसा नहीं रहता।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस मामले में व्यक्तिगत पहलू बहुत अधिक हैं। बेहतर होगा कि कोई और इसकी सुनवाई करे।’’ जिमखाना क्लब के सदस्य विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन ने भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के 22 मई के आदेश के खिलाफ अलग-अलग मुकदमे दायर किए हैं। इस आदेश में औपनिवेशिक काल के इस क्लब की स्थायी लीज डीड समाप्त कर दी गई थी और ‘‘रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सुरक्षित करने’’ के आधार पर क्लब से पांच जून तक जमीन वापस करने को कहा गया था। ऐसी जानकारी है कि खुराना की ओर से दायर मुकदमे को क्लब के 500 से अधिक सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने एलएंडडीओ के एक संपदा अधिकारी द्वारा क्लब प्रबंधन को 29 जून को जारी किए गए बेदखली संबंधी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए भी आवेदन दायर किए हैं। केंद्र सरकार ने इससे पहले कहा था कि फिलहाल वह क्लब को खाली कराने के संबंध में कोई जबरन कार्रवाई नहीं करेगी। केंद्र ने मुख्य मामले में अपने जवाब में कहा है कि इन मुकदमों को खारिज किया जाना चाहिए। उसने कहा है कि तीसरे पक्ष के लोग अधिकारियों और क्लब के बीच जमीन को लेकर अब समाप्त की जा चुकी लीज डीड से उत्पन्न अधिकारों को लागू करने से नहीं रोक सकते। जिमखाना क्लब के कर्मचारियों की ओर से दायर मुकदमे में कहा गया है कि वे क्लब में रसोइये, वेटर, सफाई कर्मचारी, माली और मैदान की देखभाल करने वाले कर्मचारी, इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर, लाइफगार्ड तथा सुरक्षा कर्मी आदि के रूप में काम करते हैं। उन्होंने अपनी आजीविका के स्रोत के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(जी) और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है। केंद्र के 22 मई के नोटिस को रद्द करने का अनुरोध करते हुए याचिका में कहा गया कि दिल्ली जिमखाना क्लब उनके लिए मनोरंजन की जगह नहीं, बल्कि कार्यस्थल है। खुराना ने अपने मुकदमे में कहा है कि केंद्र द्वारा रक्षा बुनियादी ढांचे और सुरक्षा को लेकर दिए गए ‘‘अस्पष्ट’’ और ‘‘सामान्य’’ कारण महज ‘‘बहाना’’ हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कदम कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय ‘‘जबरन बेदखली’’ करने का प्रयास है। खुराना ने अपने अंतरिम आवेदन में कहा है कि 29 जून का नोटिस ‘‘पूरी तरह गलत और समय से पहले लगाए गए अनुमानों’’ पर आधारित है, जो लंबित मुकदमे के मूल आधार को प्रभावित करते हैं। आवेदन में कहा गया है कि कारण बताओ नोटिस ‘‘समय से पहले’’ जारी किया गया, क्योंकि इसमें गलत तरीके से यह मान लिया गया कि जिमखाना क्लब की स्थायी लीज वैध रूप से समाप्त की जा चुकी है।

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