दिल्ली : न्यायालय ने विजयन और अन्य के खिलाफ जांच पर एक सप्ताह की रोक लगाई - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

दिल्ली : न्यायालय ने विजयन और अन्य के खिलाफ जांच पर एक सप्ताह की रोक लगाई

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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और उनके दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ जांच पर बुधवार को एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने विजयन तथा अन्य को केरल उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ खंडपीठ का रुख करने की अनुमति दी। शीर्ष अदालत विजयन और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने कहा, ‘‘हम इस आदेश को रद्द करते हैं और याचिकाकर्ताओं को खंडपीठ के समक्ष अपील करने की अनुमति देते हैं। हम स्पष्ट करते हैं कि हमारी टिप्पणियां केवल मौजूदा मुद्दे तक सीमित हैं। ये टिप्पणियां मामले के गुण-दोष पर हमारी राय नहीं हैं।’’ 


अदालत ने कहा, ‘हम याचिकाकर्ताओं को कानून के अनुसार अपील करने और अंतरिम राहत मांगने की छूट देते हैं। ऐसा करने का अवसर देने के लिए हम निर्देश देते हैं कि संबंधित प्राथमिकी के तहत जांच एक सप्ताह तक स्थगित रहेगी।’’ शीर्ष अदालत ने ईडी से अन्य संस्थाओं के वैधानिक अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करने को भी कहा। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘आप धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत अपनी जांच कीजिए। अपनी शिकायत दर्ज कीजिए..आप अभियोजन की कार्यवाही आगे बढ़ाइए, लेकिन अपनी वैधानिक सीमाओं से आगे मत बढ़िए। हम आपको (ईडी) स्पष्ट रूप से बता रहे हैं। अन्य संस्थाओं के वैधानिक अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने के लिए वैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल मत कीजिए।’’ न्यायमूर्ति बागची ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘आपने क्या किया है और उच्च न्यायालय ने क्या किया है, इसे लेकर हम पूरी तरह स्पष्ट हैं। हम प्राथमिकी बरकरार रखेंगे, लेकिन जब तक अपीलीय अदालत इन मुद्दों पर फैसला नहीं कर लेती, तब तक कोई जांच नहीं होगी।’’ इससे पहले, ईडी की ओर से पेश अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने उच्च न्यायालय के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि आरोपियों को इस आदेश को चुनौती देने का अधिकार नहीं है, क्योंकि ईडी की ओर से दी गई जानकारी से संज्ञेय अपराध का खुलासा हुआ था। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह कथित हवाला लेनदेन की जांच करने या धनशोधन के अपराध में अभियोजन चलाने के ईडी के अधिकार पर सवाल नहीं उठा रही है। 


हालांकि, न्यायालय ने कहा कि जब ईडी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध की जानकारी राज्य को देकर अपना कर्तव्य पूरा कर दिया, तो कानून के अनुसार कार्रवाई करना राज्य का काम था। शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने ‘‘जल्दबाजी में काम किया’’ और विजयन तथा अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया। इससे पहले, 15 अक्टूबर को केरल उच्च न्यायालय ने एकल न्यायाधीश के नौ अक्टूबर के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की विजयन, वीणा और रियास की याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ‘‘भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी को प्राथमिकी दर्ज होने से पहले उसका पक्ष सुने जाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।’’ तीनों ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी अर्जियों में दावा किया था कि प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने से पहले एकल न्यायाधीश द्वारा उनका पक्ष नहीं सुना गया। उन्होंने उच्च न्यायालय के समक्ष यह भी दावा किया कि जिस याचिका पर एकल न्यायाधीश ने नौ अक्टूबर का आदेश पारित किया था, वह जनहित याचिका के स्वरूप में थी और इसलिए इसकी सुनवाई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली खंडपीठ द्वारा की जानी चाहिए थी। सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (वीएसीबी) की विशेष जांच इकाई-1 द्वारा इस मामले के संबंध में विजयन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज किये जाने के बाद उच्च न्यायालय में अपील की गई थी। केरल उच्च न्यायालय ने नौ अक्टूबर को वीएसीबी को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा राज्य पुलिस को सौंपी गई एक रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत अपनी जांच और छापेमारी के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सीएमआरएल ने आईटी परामर्श सेवाओं के नाम पर वीणा की कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ (अब बंद हो चुकी) को 2.78 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया था।

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