दिल्ली : माकपा ने जनगणना नियमों में किए गए संशोधनों को वापस लेने के लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

दिल्ली : माकपा ने जनगणना नियमों में किए गए संशोधनों को वापस लेने के लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखा

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नई दिल्ली। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम. ए. बेबी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर जनगणना नियम, 1990 में किए गए संशोधनों को वापस लेने के लिए उनके हस्तक्षेप की मांग की है। बेबी ने जनगणना के लिए गणनाकार नियुक्त किए जा सकने वाले लोगों की श्रेणियों का विस्तार किए जाने पर चिंता जताई है। राष्ट्रपति को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 16 अक्टूबर को अधिसूचित संशोधनों के बाद गणनाकारों की निष्पक्षता, उनके चयन के मानदंडों और पक्षपातपूर्ण हस्तक्षेप को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों पर सवाल उठते हैं। 


जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 के तहत सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों, संस्थानों, सोसायटियों और ट्रस्टों के कर्मचारियों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, वैधानिक निकायों, बैंकों और कंपनियों के अधिकारियों तथा लिपिकीय कर्मचारियों को भी गणनाकार नियुक्त किया जा सकता है। इन नियमों में राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन की ओर से उपयुक्त समझे जाने वाले किसी भी व्यक्ति को नियुक्त करने की अनुमति भी दी गई है। बेबी ने कहा कि स्पष्ट रूप से तय मानदंडों और सार्वजनिक जवाबदेही वाले सुरक्षा उपायों के बिना राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को दिए गए इस अधिकार से मनमानी और राजनीतिक रूप से प्रेरित नियुक्तियों की काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा, ‘‘जनगणना में हर घर और हर व्यक्ति से व्यापक निजी जानकारी एकत्र की जाती है। जिन लोगों पर उन्हें (लोगों का) भरोसा नहीं होगा, वे उनके (गणनाकर्मियों के) साथ ऐसी जानकारी साझा करने में हिचकिचाएंगे।’’ उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में लोगों की यह आशंका जायज है कि उनके द्वारा दी गई जानकारी का इस्तेमाल उनकी राजनीतिक पहचान तय करने, विशेष समुदायों को निशाना बनाने, उनकी नागरिकता पर सवाल उठाने या उन्हें उनके वैध अधिकारों और सुविधाओं से वंचित करने के लिए किया जा सकता है।

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