सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन की 25 साल की यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में, हमारे नेताओं ने शंघाई सहयोग संगठन की 25 साल की यात्रा पर प्रकाश डाला। वह अवसर न केवल हमारी साझा यात्रा की समीक्षा करने के लिए था, बल्कि भविष्य की दिशा पर विचार-विमर्श करने के लिए भी था।’’ बिश्केक में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एससीओ के लिए सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों को लेकर भारत के दृष्टिकोण को दोहराया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, ‘‘अब समय आ गया है कि इन तीन स्तंभों को केवल एक सोच तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इन्हें ठोस परिणामों में बदला जाए। इसके लिए सबसे पहली और आवश्यक शर्त शांति एवं सुरक्षा है।’’ उन्होंने कहा था कि एससीओ का सहयोग सीधे लोगों तक पहुंचना चाहिए। दुशान्बे में, रक्षा मंत्री सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि ‘इंटरनेशनल सोलर एलायंस’ और ‘कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर’ जैसी भारत की वैश्विक पहल किफायती स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल विकास में योगदान देती हैं। उन्होंने कहा कि ‘मिशन लाइफ’ टिकाऊ जीवनशैली और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देता है, जबकि ‘ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस’ स्वच्छ और अधिक टिकाऊ ऊर्जा समाधानों को प्रोत्साहित करता है।
पत्र सूचना कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक के संयुक्त संदेश को स्वीकार किया, जिसमें 2027 के लिए एससीओ का बजट, इससे जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय, तथा 2026-2030 के लिए पीएमटीईसी कार्ययोजना शामिल हैं। एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद संबंधित संगठन में एक महत्वपूर्ण तंत्र है, जो सदस्य देशों के बीच आर्थिक और अन्य व्यावहारिक सहयोग के क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार है। भारत 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है और इसके विभिन्न तंत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है। एससीओ बैठक से इतर, सिंह ने ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रसूलजादा से मुलाकात की और भारत तथा ताजिकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी सांस्कृतिक संबंधों तथा लोगों के बीच गहरे जुड़ाव पर जोर दिया। उन्होंने दुशान्बे में एससीओ बैठक के दौरान ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ़ से भी मुलाकात की।

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